जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने राजपत्रित अधिकारियों की समीक्षा बैठक में साइबर फ्रॉड और ई-जीरो एफआईआर पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर अपराधों में पीड़ितों को जल्द राहत देने पर जोर दिया और लंबित ई-जीरो एफआईआर का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई की शिकायतों और लंबित गंभीर अपराधों की भी समीक्षा की गई। एसपी ने अधिकारियों को जांचें जल्द पूरी करने और शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए। जबलपुर में हाल ही में सीबीआई अधिकारी बनकर वृद्ध दंपती से 22 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया।
जबलपुर के शासकीय विज्ञान महाविद्यालय (स्वशासी) में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट सेल द्वारा ‘डिजिटल अवेयरनेस एंड साइबर सिक्योरिटी’ पर अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करने और आवश्यक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। दो से तीन माह के इस प्रशिक्षण में डिजिटल जागरूकता, साइबर सुरक्षा और रोजगार कौशल सिखाए जाएंगे, जिसके बाद ई-सर्टिफिकेट मिलेगा। प्राचार्य डॉ. शिखा सक्सेना ने इसे करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।
भोपाल में 24 घंटे के भीतर साइबर ठगी के छह मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में ठगों ने मोबाइल हैक करने, रिश्तेदार की फर्जी आईडी बनाने, गेम के माध्यम से एपीके फाइल भेजने और घर बैठे नौकरी का लालच देने जैसे विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया। एक वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सहित कई लोग इन धोखाधड़ी का शिकार हुए, जिनसे कुल लाखों रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर ठगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बचने के लिए एक नई ‘कैश-आउट गैंग’ बनाई है। यह गिरोह हर बड़े शहर में कमीशन एजेंट तैनात करता है, जो ठगी की रकम बैंक खाते में आते ही कुछ ही मिनटों में एटीएम से निकाल लेते हैं। इसके बाद यह रकम कैश डिपोजिट मशीन के जरिए सरगनाओं तक पहुंचा दी जाती है, जिससे पीड़ित के शिकायत करने से पहले ही खाते खाली हो जाते हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे ऑपरेशन को तीन राज्यों में बांटा जाता है, जिससे नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कोहेफिजा पुलिस की जांच में इस देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जहाँ एक वर्ष में 600 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी दर्ज की गई है। इन अपराधों की जांच के लिए साइबर पुलिस के पास केवल 300 कर्मी हैं, जिनमें आईटी एक्ट के तहत विवेचना के लिए केवल 19 निरीक्षक अधिकृत हैं। आरोपितों का अंतरराज्यीय नेटवर्क और पहचान छिपाने की प्रवृत्ति जांच को जटिल बनाती है। संसाधनों की कमी और अलग कैडर न होने के कारण जांच में देरी होती है, जबकि पिछले चार वर्षों में ठगी की राशि में 1100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी मामलों में बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विवादित राशि स्पष्ट होने पर पूरे खाते को फ्रीज करना उचित नहीं, बल्कि जांच एजेंसियां केवल संदिग्ध राशि पर डेबिट फ्रीज लगाएं। पूरे खाते को असाधारण परिस्थितियों में ही फ्रीज किया जा सकता है, जिसके लिए कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह फैसला भोपाल निवासी अर्चना शिवहरे की याचिका पर आया, जिनका 2.51 करोड़ रुपये का खाता मात्र 980 रुपये के संदिग्ध लेनदेन के कारण फ्रीज कर दिया गया था। कोर्ट ने शिकायत निवारण और खाता सक्रियण के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है।
सुप्रीम कोर्ट नीट परीक्षा को ऑनलाइन कराने पर केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स के सुझावों का इंतजार कर रहा है। कोर्ट ने ऑनलाइन प्रणाली के लिए साइबर सुरक्षा और डेटाबेस सुरक्षा जैसे अतिरिक्त इंतजामों की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सुनवाई RJD सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर हुई, जो 3 मई की नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के बाद रद्द होने और दोबारा परीक्षा से संबंधित है। केंद्र सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित उच्च स्तरीय समिति में नंदन नीलेकणि, एस. सोमनाथ, तपन डेका सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
जबलपुर हाई कोर्ट ने साइबर ठगी के एक मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की जांच पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की, डीजीपी को तलब किया। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि साइबर अपराधी कुछ मिनटों में वारदात को अंजाम देते हैं, जबकि जांच एजेंसियां कछुए की चाल से काम कर रही हैं, जिससे ठगी गई रकम की बरामदगी की संभावना कम होती है। कोर्ट ने असम पुलिस की 11 दिन में मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी की सराहना की। हाई कोर्ट ने राज्यों, बैंकों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर भी चिंता जताई और राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की गई है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर में छह लाख रुपये की कथित साइबर ठगी मामले में पुलिस-प्रशासन की सुस्त कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने जांच में देरी पर गंभीर सवाल उठाते हुए 31 जुलाई को अगली सुनवाई निर्धारित की है। कोर्ट ने असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड के DGP, संबंधित राज्यों के गृह सचिवों, केंद्र सरकार के गृह सचिव, दूरसंचार विभाग के केंद्रीय सचिव और जबलपुर SP सहित अन्य अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।