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पश्चिम मध्य रेलवे ने उज्जैन-भोपाल मार्ग पर तीन जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें शुरू कीं

पश्चिम मध्य रेलवे ने श्रावण मास में उज्जैन में धार्मिक आयोजनों के कारण श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के मद्देनजर तीन जोड़ी अनारक्षित मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। ये ट्रेनें उज्जैन से भोपाल और संत हिरदाराम नगर के बीच 8 सितंबर तक प्रतिदिन चलेंगी। इनमें 09305/09306 उज्जैन-संत हिरदाराम नगर, 09307/09308 उज्जैन-भोपाल और 09313/09314 उज्जैन-संत हिरदाराम नगर मेला स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों का तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर सहित कई स्टेशनों पर ठहराव रहेगा, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन मिलेगा।

महाकाल सवारी: 46 साल बाद बदला हाथी, सुमा पर सवार हुए राजा

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। अवंतिकानाथ चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस बार बीमार श्यामू हाथी के स्थान पर मादा हाथी सुमा ने पहली बार सवारी में भाग लिया, जिससे 46 साल से चली आ रही रामू-श्यामू हाथी परिवार की सेवा समाप्त हो गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पूजन कर सवारी को रवाना किया। सवारी परंपरागत मार्गों से शिप्रा तट पहुंची, जहां जलाभिषेक हुआ। 5 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे तक भक्ति का उल्लास छाया रहा, जिसमें 15 से अधिक दल और 1200 जवान शामिल थे।

उज्जैन में नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 24 घंटे के लिए खुलेंगे, सावन का तीसरा सोमवार भी

उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 17 अगस्त, सोमवार को 24 घंटे के लिए खोले जाएंगे। इस वर्ष नागपंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़ने से एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के साथ बाबा महाकाल की दिव्य सवारी का पुण्य लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे। लाखों श्रद्धालुओं की अपेक्षित भीड़ के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं, जिनमें पार्किंग, प्रसाद वितरण, चिकित्सा सुविधाएँ और व्हीलचेयर सेवाएँ शामिल हैं।

लालघाटी गुफा मंदिर सावन सोमवार के लिए तैयार, विशेष अभिषेक और पूजन कार्यक्रम होंगे आयोजित

भोपाल के लालघाटी स्थित प्रसिद्ध गुफा मंदिर सावन सोमवार के लिए पूरी तरह तैयार है। प्राकृतिक कंदरा में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग का यह पावन धाम मध्य भारत के भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर के पंडित लेखराज शर्मा के अनुसार, महंत नारायणदास त्यागी महाराज ने 1949 में इस गुप्त कंदरा की खोज की थी और 1965 में इसका पुनर्निर्माण कर जन-साधारण के लिए खोला गया। सावन सोमवार पर अलसुबह विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार, आरती और महामृत्युंजय जाप के बाद मंदिर के कपाट खुलेंगे। शाम को भी विशेष अभिषेक और महाआरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन, सुरक्षा, पेयजल और महाप्रसाद के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

महाकाल के भोग के लिए आज भी मांगी जाती है भिक्षा

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं हैं। भगवान महाकाल के भोग के लिए एक दिन पहले भिक्षा मांगने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है, जिसमें पुजारी परिवार द्वारा नियुक्त व्यक्ति शहर की 20 से अधिक दुकानों से सामग्री एकत्र करता है। भस्म आरती के लिए 16 अधिकृत पुजारी ही होते हैं। आरती से पूर्व मंदिर के पट आज्ञा लेकर खुलते हैं, 16 मंत्रों से अभिषेक होता है और नंदी के अभिषेक के बाद भगवान का भव्य शृंगार होता है। भस्म अर्पण के समय महिलाएं घूंघट रखती हैं। सावन में सोमवार को भगवान उपवास भी रखते हैं, और चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनती है।

धमतरी के प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में पहली बार वाराणसी की तर्ज पर महानदी आरती

धमतरी के महानदी तट स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दौरान हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष पहली बार वाराणसी की तर्ज पर महानदी आरती का आयोजन किया जा रहा है। युवा ब्रिगेड की पहल पर यह आरती सावन के प्रत्येक सोमवार की शाम रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के घाट पर आयोजित हो रही है। राम वनगमन परंपरा से जुड़ा यह स्वयंभू शिवधाम छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास काल में आराधना की थी। इसकी महिमा का उल्लेख शिवपुराण और स्कंद पुराण में भी मिलता है।

प्राशर आश्रम: सावन में शिव मंदिर और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों की पहली पसंद

इंदौर के निकट स्थित प्राशर आश्रम सावन माह में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। यह स्थान धार्मिक आस्था और शिव भक्ति का केंद्र होने के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। हरी-भरी पहाड़ियों से घिरी प्राशर झील और प्राचीन शिव मंदिर यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करते हैं। सावन में यहां विशेष मेले का आयोजन हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन हजारों लोग पहुंच रहे हैं। यह पारिवारिक भ्रमण और पिकनिक के लिए एक उत्तम स्थल है, जो शहर की भागदौड़ से दूर शांत वातावरण प्रदान करता है।

श्रावण के पहले सोमवार को बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की सवारी निकलेगी

श्रावण के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकलेगी। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यापक इंतजाम किए हैं। महाकाल की सवारी की थीम ‘वैदिक उद्घोष’ होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे। वहीं, ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में दिव्य नौका विहार आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों तीर्थ स्थल धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों से शिवमय वातावरण में डूबे रहेंगे।

उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी निकली: चंद्रमौलेश्वर रूप में दिए दर्शन

उज्जैन में सावन माह के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकली। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार हर सवारी में अलग-अलग थीम होंगी और कावड़ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। इस साल सावन में 4 और भादौ में 2 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें विभिन्न दल और व्यवस्थाएं शामिल होंगी।

रामेश्वरम से इंदौर तक 2100 किमी डाक कावड़ यात्रा, 171 घंटे में होगी पूरी

इस वर्ष तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से इंदौर तक 2100 किलोमीटर की नॉनस्टॉप सीताराम डाक कावड़ यात्रा 171 घंटों में पूरी होगी। अरण्यधाम संत आश्रम के संस्थापक महामंडलेश्वर रामजी बाबा द्वारा 2015 में शुरू की गई इस परंपरा में श्रद्धालु सावन माह में महादेव का जलाभिषेक करते हैं। 10 अगस्त को इंदौर से 250-300 श्रद्धालुओं का जत्था रामेश्वरम के लिए रवाना होगा, और 15 अगस्त को वहां से यात्रा की शुरुआत होगी। यात्रा के दौरान खान-पान के लिए 25 सदस्यीय रसोइयों का दल भी साथ रहेगा, जिसमें प्रत्येक कांवड़िया 150-200 किलोमीटर की दूरी बारी-बारी से दौड़ेगा।