पश्चिम बंगाल विधानसभा में हाल ही में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, धन के उपयोग, स्वास्थ्य व्यवस्था, आपदा राहत और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने इसे ‘संगठित अपराध’ बताया और कहा कि इससे बंगाल की पाँच पीढ़ियों को नुकसान हुआ है। उन्होंने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मध्य प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बने 59 छात्रावासों की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 22 छात्रावासों का उपयोग महिलाओं के बजाय स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और सरकारी कार्यालयों जैसे अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा था। 31 मार्च 2024 तक केवल 13 छात्रावास ही पूरी तरह या आंशिक रूप से संचालित पाए गए, जबकि चार बंद थे और 12 जर्जर स्थिति में थे। 11 स्वीकृत डे-केयर सेंटरों में से एक भी चालू नहीं मिला। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2019-2024 के दौरान वास्तविक आवश्यकता का कोई सर्वेक्षण नहीं किया।