मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीसीटी के कारण किसी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और पदोन्नति के बाद रिवर्ट करने की स्थिति भी नहीं बननी चाहिए। मुख्यमंत्री के इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के महासचिव उमाशंकर तिवारी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। यह मुद्दा तब उठा जब सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण कई पदोन्नति प्रक्रियाएं रुक गईं और कुछ आदेश निरस्त कर दिए गए थे।
मध्य प्रदेश में 2016 के बाद शुरू हुई पदोन्नतियों पर सवाल उठ रहे हैं, जहां कुछ विभागों में केवल नोटिस के आधार पर पदोन्नतियां रोकी जा रही हैं और अनारक्षित पदों पर कार्रवाई नहीं हो रही। भारतीय पशु चिकित्सा परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से शिकायत की है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने भी कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण की आड़ में पदोन्नति रोकने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति नियम 2025 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई संभावित है।