कारगिल विजय को 27 वर्ष बीत जाने के बाद भी सूबेदार लक्ष्मण सिंह जैसे रणबांकुरों की स्मृतियों में युद्ध के पल ताजा हैं। इंदौर निवासी सूबेदार लक्ष्मण सिंह, जो 18 गढ़वाल राइफल्स में थे, ने द्रास, तोलोलिंग और बटालिक सेक्टर में पाकिस्तान के घुसपैठियों से भारतीय चौकियों को मुक्त कराने के संघर्ष को याद किया। उन्होंने घायल साथियों को कंधों पर ढोकर बेस कैंप तक पहुंचाने का कार्य किया और अपने शहीद साथी राइफलमैन विक्रम सिंह के बेटे को भी 18 गढ़वाल राइफल्स में देश सेवा करते देख गर्व महसूस करते हैं। युद्ध के दौरान 527 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।