रक्षा मंत्रालय फ्रांस सरकार के FCAS छठी पीढ़ी लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रयासरत है। संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने मंत्रालय से ऐसे विमानों की खरीद के लिए रोडमैप मांगा है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में छठी पीढ़ी के विमानों के विकास और अधिग्रहण के लिए स्पष्ट दिशा तय करने की सिफारिश की, क्योंकि युद्ध तेजी से वायु-केंद्रित हो रहा है। भारत के स्वदेशी AMCA का डिजाइन तैयार है, जबकि LCA MK-II और AMCA डिजाइन एवं विकास चरण में हैं। समिति ने रक्षा तैयारियों में निवेश, वायुसेना के बजट में वृद्धि और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
राजस्थान के जैसलमेर में सड़क हादसे में शहीद हुए मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर रविवार सुबह इंदौर स्थित उनके निवास पर पहुंचा। उन्हें सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम दर्शन के लिए रखे गए पार्थिव शरीर से तिरंगा हटाकर उनकी पत्नी को सौंपा गया। इस दुर्घटना में मेजर हमजा की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लेफ्टिनेंट घायल हो गए थे। परिवार जैसलमेर से विशेष सैन्य वाहन में पार्थिव देह लेकर इंदौर पहुंचा था।
रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी जेन टेक्नोलॉजीज ने करगिल विजय दिवस के अवसर पर भारत का पहला स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड मैन-पोर्टेबल एंटी-ड्रोन सिस्टम (एमपीएडीएस) लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में दुश्मन के ड्रोनों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए बनाया गया है। इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित ड्रोन डिटेक्टर और डेटा फ्यूजन एवं कमांड सेंटर लगा है, जिससे ऑपरेटर तुरंत कार्रवाई का निर्णय ले सकते हैं। यह प्रणाली भारत के रक्षा क्षेत्र को मजबूत करेगी और सीमावर्ती सैनिकों को हवाई खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगी।
कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस, धैर्य और सैन्य कौशल का प्रतीक है, जिसे हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1999 में द्रास, बटालिक सहित दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में लड़े गए इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने सीमित ऑक्सीजन और ऊंची चोटियों पर दुश्मन की मौजूदगी जैसी विषम चुनौतियों का सामना किया। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती सामरिक बढ़त के बावजूद, भारतीय सेना ने सुनियोजित अभियान, असाधारण साहस और प्रभावी तोपखाना समर्थन से सभी ठिकानों को मुक्त कराया। युद्ध में 527 सैनिक शहीद हुए और 1,300 से अधिक घायल हुए।
जबलपुर स्थित आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) भारतीय सेना के लिए स्वदेशी और अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान का एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बनने जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर में एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन के प्रभावी प्रदर्शन के बाद यहां उत्पादन को नई गति दी जाएगी। इसमें 120, 220, 450 किलोग्राम और थाउजेंड पाउंडर बमों की नई खेप शामिल है। राफेल और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों के लिए 500 और 1000 किलोग्राम के स्वदेशी जनरल पर्पस एरियल बम, 250 किलोग्राम के बंकर-बख्तरबंद ध्वस्त करने वाले बम और 125 मिमी एफएसएपीडीएस टैंकभेदी गोला-बारूद भी तैयार होगा।