तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली में सीजेपी के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह सीजेपी आंदोलन में शामिल होने दिल्ली जाएंगी। ममता ने केंद्र पर लोकतांत्रिक विरोधों को दबाने, तानाशाही करने और कोविड-19 खरीद व धार्मिक आयोजनों में भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कोविड मामलों की जांच में पीएम मोदी का नाम आ सकता है। सीजेपी आंदोलन परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ, जिसमें सोनम वांगचुक की रिहाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
इंदौर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक प्रकरण को लेकर भंवरकुआं चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है। इसमें छात्र, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक शामिल हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में अनशन पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का भी विरोध किया गया। आंदोलन के नेताओं ने इसे गैर-राजनीतिक और संवैधानिक बताया, जिसका उद्देश्य लाखों छात्रों का भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।