मैहर जिले में शासकीय संदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रामनगर की एक स्कूल बस शुक्रवार को देवरी कलां-मसमासी मार्ग पर डीजल खत्म होने से बीच रास्ते में रुक गई। बस में सवार दर्जनों छात्र-छात्राएं सुनसान सड़क पर उतरने को मजबूर हुए और काफी देर तक मदद का इंतजार करते रहे, जिससे सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए। यह पहली घटना नहीं है और आरोप है कि सिद्धि विनायक ट्रांसपोर्ट, देवास की लापरवाही के कारण बसें अक्सर खराब होती हैं। प्राचार्य ने बताया कि कंपनी को समय पर भुगतान न मिलने की बात कहती है और बसों में कम ईंधन देने के लिए कंपनी जिम्मेदार है।
मल्हारगढ़ में सांदीपनि सीएम राइज स्कूल के अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास के लगभग 30 छात्रों को प्रतिदिन 3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है, क्योंकि स्कूल बसें उनके छात्रावास के सामने से निकलने के बावजूद उन्हें नहीं बैठातीं। इससे छात्रों के दो घंटे बर्बाद होते हैं और उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। छात्रों को बारिश में भीगने, पुस्तकों के खराब होने और सड़क दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। प्राचार्य अशोक वाघेला ने स्वीकार किया कि बसों में जगह की कमी है और एक-दो दिन में नई बस की व्यवस्था का आश्वासन दिया है। कांग्रेस ने इसे छात्रों के साथ अन्याय बताया है।
इंदौर में स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए नियमों का पालन संतोषजनक नहीं है। सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए जीपीएस, सीसीटीवी, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स और प्रशिक्षित स्टाफ जैसे नियम जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पा रहे हैं। फीस में कई गुना वृद्धि के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हुई है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा हाल ही में की गई कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि व्यवस्था अभी भी पटरी पर नहीं आई है। ऑटो और वैन में ओवरलोडिंग भी एक बड़ी समस्या है, जिस पर कार्रवाई की गई है।
भिंड शहर में सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनोज कुमार गोयल के नेतृत्व में एक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दो घंटे के अभियान में 60 से अधिक वाहनों के चालान किए गए और लगभग डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। स्कूल बसों में पैनिक बटन बंद, स्पीड गवर्नर न होना और महिला अटेंडर की अनुपस्थिति जैसी कई सुरक्षा खामियां पाई गईं। चार पहिया और दोपहिया वाहनों के दस्तावेजों की भी जांच की गई। अभियान के दौरान एक दूल्हे की कार का भी चालान किया गया, जिसके दस्तावेज पूरे नहीं थे। अधिकारियों ने भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखने की बात कही है।