बैतूल जिला अस्पताल में 84.98 लाख रुपये की लागत से निर्मित 30 बिस्तरों का विश्रामालय लोकार्पण के तीन माह बाद भी बंद है। मई में जनप्रतिनिधियों द्वारा लोकार्पित यह भवन मरीजों के स्वजन के लिए बनाया गया था, लेकिन संचालन प्रक्रिया स्पष्ट न होने के कारण इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। दूरदराज से आने वाले मरीजों के परिजन ठहरने की समस्या से जूझ रहे हैं और अस्पताल के बरामदों या फर्श पर रात बिताने को मजबूर हैं। आरएमओ डॉ. रानू वर्मा के अनुसार, संचालन के दिशा-निर्देशों का इंतजार है और कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा गया है।
जबलपुर विकासखंड की रीमा ग्राम पंचायत में सड़क न होने के कारण 11 वर्षीय माया मरावी के शव को हाथ ठेले पर ले जाना पड़ा। बच्ची का निधन मेडिकल कॉलेज जबलपुर में हुआ था। परिजन शव को निजी वाहन से गांव ला रहे थे, लेकिन कच्चा रास्ता कीचड़ में बदल जाने से वाहन फंस गया। ग्रामीणों ने बरगी नगर से हाथ ठेला मंगाकर शव को गांव तक पहुंचाया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पक्की सड़क नहीं है और हर बारिश में रास्ता दलदल बन जाता है, जिससे एम्बुलेंस भी नहीं आती। आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल सर्व-मौसमी पक्की सड़क बनाने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।