मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के तहत अस्पतालों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब नए एम्पैनलमेंट या विशेषज्ञता बढ़ाने हेतु आवेदन करने वाले अस्पतालों को तीन मिनट का अनकट वीडियो देना अनिवार्य होगा, जिसमें अस्पताल की सभी सुविधाओं का फिल्मांकन हो। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों के लिए हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) आईडी और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) आईडी भी अनिवार्य की गई है। योजना से जुड़े अस्पतालों को तीन माह के भीतर मेडिकल रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी करना होगा।
उमरिया में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर एक 108 एम्बुलेंस में नवजात शिशु का सुरक्षित प्रसव हुआ। करकेली के ग्राम पड़ेरा की 22 वर्षीय सिलोचिनी बाई गोंड को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने 108 सेवा को सूचित किया। पायलट प्रदीप कचेर प्रसूता को अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में पीड़ा तेज हो गई। प्रदीप कचेर ने सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए एम्बुलेंस के भीतर ही सफलतापूर्वक प्रसव कराया। जिला प्रबंधक सत्येन्द्र कुमार वर्मा ने पायलट की सराहना की।
भोपाल के सिद्धांता रेडक्रास सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और सृष्टि हॉस्पिटल को आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से निलंबित कर दिया गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने योजना में अनियमितताएं मिलने पर यह कार्रवाई की, जिसमें अस्पतालों के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल की जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद यह कदम उठाया गया। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह ने बताया कि दोनों अस्पतालों के खिलाफ पहले मिली शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है, और अनियमितताओं पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
मध्य प्रदेश शासन ने वर्षा ऋतु में सर्पदंश की बढ़ती आशंका के मद्देनजर इसे स्थानीय आपदा घोषित किया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी जिलों को कार्ययोजना बनाने और सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम व जीवनरक्षक दवाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, स्थानीय स्तर पर सर्प-मित्रों का नेटवर्क तैयार करने और सर्पदंश की घटनाओं का जिला स्तरीय डाटाबेस बनाने को कहा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रत्येक जिले को प्रशिक्षण एवं क्षमता वृद्धि हेतु 23.17 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश हैं।
छिंदवाड़ा के ग्राम सालीवाड़ा शारदा के खजरी मोहल्ले में बदहाल सड़क के कारण एक गर्भवती महिला तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई। प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को ग्रामीणों ने चारपाई पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे अमरवाड़ा अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी सामान्य डिलीवरी हुई और जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने सड़क का निरीक्षण कर गड्ढे भरने और स्थायी निर्माण का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में न्याय की लड़ाई तेज हो गई है। 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे पिता राम शिरोमणि मिश्रा को प्रशासन ने जबरन अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें अनशन तोड़ने पर मजबूर किया गया। इसके बाद सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने धरना शुरू किया, जिन्हें पुलिस ने धरनास्थल से उठाकर सिटी कंट्रोल रूम में नजरबंद कर दिया। विधायक ने इसे राजनीतिक नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई बताया, जिस पर वे अडिग हैं। आंदोलन लगातार बढ़ रहा है।
आयुष्मान भारत निरामयम योजना में 1 अक्टूबर से नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) प्रमाणपत्र अनिवार्य हो गया है। इससे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के लगभग 300 निजी अस्पतालों की संबद्धता प्रभावित हो सकती है। यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन ने लंबित भुगतानों और अतिरिक्त खर्च को लेकर आपत्ति जताई है और 8 अक्टूबर से योजना का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। सीईओ ने बताया कि यह शर्त गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के लिए है।
भोपाल के जिला अस्पताल जेपी में मंगलवार शाम हुई वर्षा के कारण व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। अस्पताल के कई हिस्सों जैसे आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड, सोनोग्राफी सेंटर और सीढ़ियों पर छत से पानी टपकता मिला। मरीजों के बैठने की जगहों पर, दस्तावेजों और फर्नीचर पर पानी जमा हो गया, जिससे फिसलन और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। सोनोग्राफी पंजीयन केंद्र के दस्तावेज भी भीग गए। मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से आवाजाही करनी पड़ी, जिससे उन्हें असुविधा हुई।
इंदौर उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है, तो एमटीपी एक्ट की निर्धारित शर्तों के तहत डॉक्टर और अस्पताल कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश एक नाबालिग पीड़िता की याचिका पर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य कमिश्नर को राज्य के सभी अस्पतालों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने जबलपुर उच्च न्यायालय के 2025 के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय पर्याप्त मानी गई थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। इसमें वीरांगना रानी दुर्गावती और रानी अवंती बाई लोधी पुरस्कार की राशि 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपए की गई। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए ₹44,515.13 करोड़ का बजट मंजूर हुआ, जिसमें NHM और आयुष्मान भारत के लिए धनराशि शामिल है। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय को ₹795.95 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसके साथ ही, वनोपज लाभांश वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया, जिसमें स्थानीय निवासियों और श्रमिकों को ही लाभांश मिलेगा।