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भोपाल के जेपी अस्पताल में बारिश के बाद कई वार्डों और सेंटरों में पानी भरा

भोपाल के जिला अस्पताल जेपी में मंगलवार शाम हुई वर्षा के कारण व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। अस्पताल के कई हिस्सों जैसे आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड, सोनोग्राफी सेंटर और सीढ़ियों पर छत से पानी टपकता मिला। मरीजों के बैठने की जगहों पर, दस्तावेजों और फर्नीचर पर पानी जमा हो गया, जिससे फिसलन और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। सोनोग्राफी पंजीयन केंद्र के दस्तावेज भी भीग गए। मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से आवाजाही करनी पड़ी, जिससे उन्हें असुविधा हुई।

दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए कोर्ट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं: हाई कोर्ट

इंदौर उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है, तो एमटीपी एक्ट की निर्धारित शर्तों के तहत डॉक्टर और अस्पताल कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश एक नाबालिग पीड़िता की याचिका पर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य कमिश्नर को राज्य के सभी अस्पतालों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने जबलपुर उच्च न्यायालय के 2025 के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय पर्याप्त मानी गई थी।

मोहन कैबिनेट: रानी दुर्गावती, अवंती बाई पुरस्कार राशि 1 लाख से बढ़कर 2 लाख रुपये हुई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। इसमें वीरांगना रानी दुर्गावती और रानी अवंती बाई लोधी पुरस्कार की राशि 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपए की गई। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए ₹44,515.13 करोड़ का बजट मंजूर हुआ, जिसमें NHM और आयुष्मान भारत के लिए धनराशि शामिल है। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय को ₹795.95 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसके साथ ही, वनोपज लाभांश वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया, जिसमें स्थानीय निवासियों और श्रमिकों को ही लाभांश मिलेगा।

पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा: 35 करोड़ वार्षिक खर्च, 30 जिलों को लाभ नहीं

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दो वर्ष पहले शुरू की गई पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा पर सालाना 35 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन यह सेवा गंभीर रूप से कम उपयोग की जा रही है। कंपनी को प्रतिमाह 100 घंटे का अनिवार्य किराया चुकाने के बावजूद, केवल 40% उपयोग हो पाता है और एक वर्ष में 100 से भी कम मरीज लाभान्वित होते हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में एक भी रोगी ने इस सेवा का लाभ नहीं लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके अधिक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता और जटिल प्रक्रिया के कारण स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।

मध्य प्रदेश में मेधावी योजना: ग्रामीण सेवा पर एमबीबीएस ऋण 100% माफ

मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिससे अब पात्र विद्यार्थियों को शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए भी लाभ मिलेगा। यह व्यवस्था वर्तमान शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। योजना के तहत, फीस की प्रतिपूर्ति के साथ आवश्यक अतिरिक्त राशि ब्याजमुक्त ऋण के रूप में दी जाएगी। इस ऋण को मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पांच वर्ष की सेवा पूरी करने पर 100% माफ किया जा सकेगा, जबकि ढाई वर्ष की सेवा पर 50% की छूट मिलेगी।

ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में अगस्त अंत तक शुरू होगी सीटी स्कैन-एमआरआई सुविधा

ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच सुविधा अगस्त माह के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन ने मशीनों की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी है और तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जीआरएमसी प्रबंधन ने केबल बिछाने के लिए टेंडर जारी कर कार्यादेश भी दिए हैं। इस सुविधा से गंभीर मरीजों को अस्पताल परिसर में ही तत्काल जांच मिल सकेगी, जिससे इलाज में तेजी आएगी और उन्हें पुराने परिसर ले जाने का जोखिम कम होगा। एमआरआई मशीन की लागत लगभग 17.02 करोड़ रुपये है।

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों से मारपीट, छह आरोपितों पर मामला दर्ज

जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों के साथ मरीज के स्वजनों द्वारा मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। चार अगस्त की आधी रात के बाद हुई इस घटना में नशे में धुत आरोपितों ने रेजिडेंट डॉक्टरों का कॉलर पकड़ा, थप्पड़ मारा और एक महिला डॉक्टर से भी अभद्रता की। इस घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल कर अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। पुलिस ने 16 घंटे बाद छह आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो फिलहाल फरार हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

एबीवीपी ने एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्न्स का स्टाइपेंड ₹30,000 करने की मांग की

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) महाकोशल प्रांत ने मध्य प्रदेश के एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न्स की आर्थिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन भेजा है। परिषद ने इन इंटर्न्स का मासिक स्टाइपेंड ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग की है। अभाविप ने महंगाई भत्ते के अनुरूप प्रति वर्ष स्वतः वृद्धि का स्थायी प्रावधान लागू करने की भी अपील की है। परिषद के अनुसार, इंटर्न्स अस्पतालों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वर्तमान स्टाइपेंड बढ़ती महंगाई और अन्य खर्चों के मुकाबले अपर्याप्त है, जिससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।

इंदौर जिला अस्पताल में गंभीर घायल को उपचार न मिलने का आरोप, बाद में हुई मौत

इंदौर के धार रोड स्थित नए जिला अस्पताल पर गंभीर सवाल उठे हैं। करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ बने इस अस्पताल में हाथी के हमले में घायल ऑटो चालक विजय होलकर को कथित तौर पर उपचार नहीं मिला। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया और आधे घंटे तक एंबुलेंस व स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया, जिससे घायल अस्पताल परिसर में तड़पता रहा। बाद में निजी अस्पताल में उपचार के दौरान विजय होलकर की मौत हो गई। परिजनों ने आर्थिक सहायता और मामले की जांच की मांग की है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, घायल का प्रारंभिक उपचार निजी अस्पताल में हुआ था।

इंदौर के नए जिला अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

इंदौर के 83 करोड़ की लागत से बने नए जिला अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को इसका शुभारंभ किया था, लेकिन यह पूरी क्षमता से चालू नहीं हो पाया है। वर्तमान में केवल 50 बेड और प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। परिजनों को खुद स्ट्रेचर ढोना पड़ रहा है, पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, लिफ्ट बंद पड़ी है और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की कमी के कारण तैयार वार्डों में मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं।