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पटवारियों की हड़ताल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पटवारियों की हड़ताल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने यह फैसला पटवारी संघ द्वारा हड़ताल वापस लेने की जानकारी दिए जाने के बाद सुनाया। यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने दायर की थी। याचिका में चार अगस्त से जारी पटवारियों की हड़ताल से राजस्व कार्यों और आम जनता को हो रही परेशानियों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने सरकारी कर्मचारियों के हड़ताल के अधिकार पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।

जबलपुर में आज से बढ़ा बस किराया, परिवहन विभाग ने जारी की अधिसूचना

जबलपुर में परिवहन विभाग द्वारा बस किराए में बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी होने के बाद शुक्रवार, 7 अगस्त से नई दरें लागू हो गई हैं। प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से बढ़कर 2 रुपये हो गया है, जबकि न्यूनतम किराया 7 से 10 रुपये हो गया है। अधिकांश रूटों पर 20 से 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश बस एसोसिएशन ने अपनी प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित कर दी है। परिवहन मंत्री के साथ चार दौर की चर्चा के बाद सात सूत्रीय मांगों पर सहमति बनने के बाद यह निर्णय लिया गया, जिससे प्रदेशभर में बस संचालन सामान्य रहेगा।

पटवारियों की हड़ताल के खिलाफ मप्र हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर

मध्य प्रदेश में चार अगस्त से चल रही पटवारियों की हड़ताल के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर इस याचिका में हड़ताल से आम नागरिकों को हो रही परेशानी और राजस्व कार्यों के प्रभावित होने का हवाला दिया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि शासकीय कर्मचारियों को जनसेवा से जुड़े दायित्वों के कारण हड़ताल का अधिकार नहीं है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे हैं और इस पर जल्द सुनवाई की संभावना है।

मध्य प्रदेश में 7 अगस्त की रात से बसों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, नई परिवहन नीति का विरोध

मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने सरकार की नई स्टेज कैरिज परिवहन नीति के विरोध में 7 अगस्त की रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। इस हड़ताल से जबलपुर से संचालित होने वाली 500 से अधिक बसों सहित प्रदेशभर की सेवाएं प्रभावित होंगी, जिससे मंडला, भोपाल, इंदौर जैसे विभिन्न जिलों के यात्रियों को असुविधा होगी। बस संचालकों का कहना है कि यह नीति निजी बस व्यवसाय को समाप्त कर देगी और हजारों रोजगारों पर संकट खड़ा करेगी। उनकी प्रमुख मांगों में नीति की वापसी और बस किराए में वृद्धि शामिल है।

मध्य प्रदेश में सात साल बाद बढ़ा बस किराया, दैनिक यात्रियों पर पड़ेगा सबसे अधिक असर

मध्य प्रदेश सरकार ने सात साल बाद यात्री बसों का किराया बढ़ा दिया है, जिससे उज्जैन और आसपास के जिलों से रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोग प्रभावित होंगे। परिवहन विभाग ने सामान्य बसों का अधिकतम किराया ₹2 प्रति यात्री प्रति किलोमीटर और न्यूनतम किराया ₹10 निर्धारित किया है। इस वृद्धि से दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का मासिक यात्रा बजट बढ़ेगा। बस संचालकों ने बढ़ती परिचालन लागत के कारण इसे आवश्यक बताया है। किराया वृद्धि के बाद 7 अगस्त से प्रस्तावित निजी बस संचालकों की हड़ताल टल गई है।

मध्यप्रदेश में पटवारियों पर सीधी एफआईआर नहीं होगी

मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पटवारियों के विरुद्ध सीधी एफआईआर दर्ज न की जाए। एफआईआर से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण अनिवार्य होगा। यह निर्णय पटवारी संघ के ज्ञापन और उनकी मांग पर लिया गया है, जिसमें वसीयत व अन्य राजस्व न्यायालयीन प्रकरणों में पटवारियों के प्रतिवेदन के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज होने की शिकायत की गई थी। हालांकि, इस आदेश के बावजूद 23 हजार पटवारी अपनी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं, जो 3 अगस्त से जारी है।

पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज न करने का निर्देश, सरकार ने मानी मांग

मध्य प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पटवारियों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज न की जाए। किसी भी पटवारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण किया जाना चाहिए। मप्र पटवारी संघ द्वारा 20 जुलाई को सौंपे गए ज्ञापन में पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज करने का मुद्दा उठाया गया था। सोमवार को पटवारियों के प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव से मुलाकात के बाद सरकार ने प्रारंभिक जांच के बिना एफआईआर दर्ज न करने की इस प्रमुख मांग को स्वीकार कर लिया है।

महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने होम्योपैथों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देने वाले सरकारी फैसले के विरोध में राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। एमएआरडी ने अदालत के अंतिम फैसले तक बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीकरण प्रक्रिया को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि बातचीत विफल रही है और 24 घंटे बाद आपातकालीन सेवाएं भी बंद हो सकती हैं। कई अन्य चिकित्सा संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है।

लंबित पांच सूत्री मांगों पर निर्णय न होने से पटवारियों की प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

इंदौर सहित पूरे प्रदेश के पटवारियों ने सोमवार से अपनी लंबित पांच सूत्री मांगों पर सरकार द्वारा निर्णय न होने के कारण अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पटवारियों ने तहसीलों में बस्ते जमा कर राजस्व संबंधी कार्यों से खुद को अलग कर लिया है, जिससे राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर असर पड़ेगा। जिला पटवारी संघ ने 8 जुलाई को मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था और 15 जुलाई से 2 अगस्त तक विभिन्न चरणों में विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। पटवारियों की प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू, पदोन्नति, समयमान वेतनमान, नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा और जज प्रोटेक्शन एक्ट में शामिल करना शामिल हैं।

जबलपुर में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, राजस्व कार्य प्रभावित

मध्य प्रदेश पटवारी संघ की जबलपुर इकाई ने लंबित मांगों पर ठोस पहल न होने के कारण सोमवार से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। जिले की सभी तहसीलों के पटवारी कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे हैं। कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति, समयमान वेतनमान और विभागीय परीक्षा उनकी प्रमुख मांगें हैं। हड़ताल से नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, फसल गिरदावरी और भूमि संबंधी अभिलेखों सहित कई राजस्व सेवाएं प्रभावित होंगी, जिससे नागरिकों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।