1947 में भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान भारत में विलय के खिलाफ थे और भोपाल को स्वतंत्र रियासत बनाए रखना चाहते थे। पाकिस्तान के साथ योजना विफल होने पर उन्होंने 14 अगस्त 1947 को रात 8:15 बजे भारतीय संघ में शामिल होने के लिए ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर किए। यह सीमित अधिकारों वाला विलय था, जिसमें रक्षा, विदेश मामले और संचार भारत सरकार को सौंपे गए, जबकि आंतरिक प्रशासन नवाब के नियंत्रण में रहा। नवाब ने फैसले को 10 दिन तक गोपनीय रखने का अनुरोध किया, लेकिन यह खबर तीन दिन में भोपाल तक पहुंच गई। 15 अगस्त को जनता आजादी का जश्न मना रही थी, जबकि विलय का फैसला उनसे छिपा था।