इंदौर की साढ़े तीन साल की अनिका के स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 के उपचार हेतु 9.55 करोड़ के इंजेक्शन मामले में हाई कोर्ट ने सरकार और एम्स को फटकारा। केंद्र सरकार ने 50 लाख रुपये की मदद की पेशकश की, जबकि जनसहयोग से 8 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। कोर्ट ने 50 लाख से अधिक अतिरिक्त सहायता तलाशने और राज्य सरकार को भी उपाय खोजने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई से पहले, राशि जुटाने वाली संस्थाओं के विवरण और एम्स खाते में राशि जमा करने की उनकी सहमति प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इंदौर हाई कोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका याचिकाकर्ता लोकेंद्रसिंह खडिय़ा ने मंगलवार को वापस ले ली। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे मामले में आगे कार्रवाई नहीं करना चाहते। याचिका में खडिय़ा ने अपनी नीट ओएमआर शीट के आधार पर 305 अंकों के बजाय 64 अंक मिलने का दावा किया था, जिससे 241 अंकों का अंतर आया था। उन्होंने एनटीए को संसद द्वारा स्थापित वैधानिक संस्था न होकर एक सामान्य सोसायटी बताते हुए उसके गठन और संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए थे, जिनके जवाब आने से पहले ही याचिका वापस ले ली गई।
इंदौर हाई कोर्ट ने मस्टर कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और लाभ न देने पर इंदौर नगर निगम के निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद आया, जिसे 42 कर्मचारियों ने दायर किया था। वर्ष 2023 में औद्योगिक अधिकरण ने मस्टर कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया था, जिसे निगम ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जून 2026 में हाई कोर्ट ने निगम की याचिका खारिज कर अधिकरण का आदेश बरकरार रखा था। कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी सरकारी आदेशों के लाभ देने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक वर्ष बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ।