छिंदवाड़ा के तामिया क्षेत्र में कोहरे के कारण कम दृश्यता में 55 वर्षीय चतुरसिंह शीलू पर जंगली हाथी ने हमला कर दिया। खेत में बैल चराते समय हुए इस हमले में उन्हें बाईं जांघ में मामूली चोटें आईं। सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने घायल को तामिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया। पुलिस ने भी बयान दर्ज किए। वन विभाग की टीमें घटना से पहले और बाद में भी जंगली हाथी की उपस्थिति वाले इलाकों में जागरूकता और निगरानी अभियान चला रही थीं।
कान्हा टाइगर रिजर्व के 16 विभागीय हाथियों को 14 से 20 सितंबर तक शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधार के लिए कार्यमुक्त रखा जाएगा। इस एक सप्ताह के पुनर्यौवन शिविर में हाथियों को विशेष आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, मालिश और सामाजिक गतिविधियों का अवसर मिलेगा। वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन हाथियों के रक्त, फीकल और मूत्र के नमूने परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे। यह शिविर लगातार 16 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें महावतों और चाराकटरों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जाता है।
संजय टाइगर रिजर्व में एक नर हाथी साथी की मौत से आक्रामक हो गया था, जिससे ग्रामीणों में दहशत थी और उसे नियंत्रित करना वन विभाग के लिए चुनौती बन गया था। इस स्थिति को संभालने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्रशिक्षित हाथी सूर्या को बुलाया गया। सूर्या की मौजूदगी ने आक्रामक हाथी को शांत कर दिया, जिससे दोनों में दोस्ती हो गई। डॉक्टरों की टीम ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद हाथी को नियंत्रित किया और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर बांधवगढ़ भेज दिया।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। अवंतिकानाथ चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस बार बीमार श्यामू हाथी के स्थान पर मादा हाथी सुमा ने पहली बार सवारी में भाग लिया, जिससे 46 साल से चली आ रही रामू-श्यामू हाथी परिवार की सेवा समाप्त हो गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पूजन कर सवारी को रवाना किया। सवारी परंपरागत मार्गों से शिप्रा तट पहुंची, जहां जलाभिषेक हुआ। 5 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे तक भक्ति का उल्लास छाया रहा, जिसमें 15 से अधिक दल और 1200 जवान शामिल थे।
बांधवगढ़ नेशनल पार्क जंगली हाथियों का नया ठिकाना बन गया है, जहां 70 से अधिक हाथी पिछले आठ सालों से रह रहे हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए इन हाथियों ने पार्क की जैव विविधता को समृद्ध किया है, जबकि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में ये चुनौती बने हुए हैं। विशेषज्ञ बांधवगढ़ में ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ शुरू करने की वकालत कर रहे हैं ताकि हाथियों की सुरक्षा हो सके और हाथी-मानव द्वंद्व समाप्त हो। यह प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को शिक्षित करने, रोजगार सृजित करने और वन्यजीवों के संरक्षण में सहायक होगा।
भगवान महाकाल की 10 अगस्त को निकलने वाली श्रावण मास की दूसरी सवारी में श्यामू हाथी अपनी सेवा का एक दशक पूरा करेगा। श्यामू 2016 में पहली बार शामिल हुआ था। सवारी वाले दिन वह सुबह से उपवास रखेगा, मंदिर रवाना होने से पहले फलाहार करेगा, जिसमें ककड़ी, तरबूज, केले और पपीता शामिल हैं। महाकाल मंदिर पहुंचने पर उसकी पीठ पर चांदी का हौदा सजाया जाएगा। श्यामू के मालिक श्रवण गिरी महाराज ने बताया कि कुछ लोगों ने उसे शहर से बाहर भेजने का षड्यंत्र किया था, लेकिन उसे सेवा का अवसर फिर मिला।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून मध्य प्रदेश में मानव-हाथी द्वंद्व पर तीन वर्षीय अध्ययन करेगा। यह अध्ययन बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व में हाथियों के व्यवहार और मूवमेंट को समझने के लिए होगा, जिससे संभावित संघर्षों का पूर्वानुमान लगाया जा सके। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को चार माह में मानव-हाथी संघर्ष से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन बनाने के निर्देश भी दिए हैं। अक्टूबर 2024 में बांधवगढ़ में दस हाथियों की मौत के बाद भी गाइडलाइन नहीं बनी थी। एक अन्य घटना में बलरामपुर में हाथी दांत के साथ तीन गिरफ्तार हुए।
इंदौर के धार रोड स्थित नए जिला अस्पताल पर गंभीर सवाल उठे हैं। करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ बने इस अस्पताल में हाथी के हमले में घायल ऑटो चालक विजय होलकर को कथित तौर पर उपचार नहीं मिला। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया और आधे घंटे तक एंबुलेंस व स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया, जिससे घायल अस्पताल परिसर में तड़पता रहा। बाद में निजी अस्पताल में उपचार के दौरान विजय होलकर की मौत हो गई। परिजनों ने आर्थिक सहायता और मामले की जांच की मांग की है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, घायल का प्रारंभिक उपचार निजी अस्पताल में हुआ था।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए एक राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा दो साल के अध्ययन के बाद तैयार की गई यह रिपोर्ट 20-25 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। इसका मुख्य लक्ष्य प्रतिवर्ष होने वाली लगभग 600 मानवीय और 120 हाथी मौतों को लगभग शून्य तक लाना है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को सर्वाधिक संवेदनशील राज्य चिह्नित किया गया है, जहाँ 100 हॉटस्पॉट हैं। यह योजना टकराव के बाद मुआवजा देने के बजाय पहले से रोकथाम पर केंद्रित है।
इंदौर में एक रिक्शा चालक को कुचलने वाले हाथी के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। महावत रामजी और मालिक संदीप निर्मोही ने उज्जैन में हाथी का पंजीयन और उज्जैन-हैदराबाद के बीच का ट्रांजिट पास प्रस्तुत किया, लेकिन हाथी को बिना अनुमति पैदल नांदेड़ से इंदौर लाया गया था। वन विभाग अब महावत और मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज करेगा। पीड़ित को आश्रम की ओर से डेढ़ लाख रुपये की सहायता दी गई थी।