मध्य प्रदेश में हेपेटाइटिस बी और सी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गए हैं, जहां हर 12वां व्यक्ति संक्रमित है। हमीदिया अस्पताल के डॉ. राजेश टिक्कस के अनुसार, 95% मरीजों में शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, जिससे लिवर को काफी नुकसान होने के बाद ही बीमारी का पता चलता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, प्रदेश में 12-23 माह के 81.5% बच्चों का ही हेपेटाइटिस बी टीकाकरण पूरा हुआ है, जबकि भोपाल में 43% बच्चे वंचित हैं। भोपाल के सरकारी ब्लड बैंक में हजारों संक्रमितों की पहचान हुई है।
हेपेटाइटिस को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर देर से सामने आते हैं, जिससे लिवर को गंभीर नुकसान होता है। चीन के बाद भारत दुनिया में हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में दूसरे स्थान पर है, जहाँ करोड़ों लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। मध्य प्रदेश में हर 12वां व्यक्ति संक्रमित है और 95% मामलों में शुरुआती लक्षण नहीं दिखते। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और पीसी सेठी अस्पताल जैसे केंद्रों में हर साल सैकड़ों मरीजों की पहचान और उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग उच्च जोखिम वाले समूहों की जांच कर रहा है और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।