मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी (कंप्यूटर प्रवीणता एवं प्रमाणन परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। इस शर्त के कारण हजारों पात्र कर्मचारियों की पदोन्नतियां रुकी हुई थीं, और कुछ विभागों ने तो पदोन्नति आदेश निरस्त भी कर दिए थे। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से 6 से 7 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे और निरस्त किए गए पदोन्नति आदेश भी वापस लिए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा।
मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो से अधिक संतान वाले लगभग 25 साल पुराने प्रावधान को खत्म करने का मामला नौकरशाही स्तर पर अटक गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) अब तक इससे संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं ला सका। पूर्व मुख्य सचिव के कार्यकाल में भी वरिष्ठ सचिव समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। मुख्यमंत्री ने GAD के एक ड्राफ्ट पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें यह पाबंदी बरकरार रखी गई थी। इस प्रावधान को 2001 में लागू किया गया था और कर्मचारी संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।