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हाई कोर्ट ने वनपाल पदोन्नति आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा, राज्य शासन को नोटिस

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सीहोर के वनरक्षक संतोष कुमार साहू की याचिका पर राज्य शासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने निर्देश दिया है कि यदि इस अवधि में वनपाल पद पर कोई पदोन्नति आदेश जारी होता है, तो वह याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसे वरिष्ठता सूची में कनिष्ठ कर्मचारियों से नीचे दर्शाया गया और उसकी आपत्ति निरस्त कर दी गई, जिससे कनिष्ठों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू हुई।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का अहम फैसला: सहमति से चार साल तक बने संबंध को दुष्कर्म नहीं माना, FIR निरस्त

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच स्वतंत्र इच्छा और बिना प्रलोभन के लंबे समय तक बने संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और आपराधिक प्रकरण को निरस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला शिक्षित, विवाहित थी और उसे पता था कि पति से तलाक के बिना विवाह संभव नहीं है। रिकॉर्ड में ब्लैकमेल या झूठे वादे का कोई साक्ष्य नहीं मिला।

एमपी हाई कोर्ट ने पिता-बेटे की मुलाकात के लिए दिए स्पष्ट निर्देश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक पिता की अपने ढाई वर्षीय बेटे से मुलाकात के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मुलाकात की तारीख, समय, स्थान, बच्चे को खिलाई जाने वाली सामग्री और फोटो लेने के तरीके पर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। यह अंतरिम व्यवस्था दोनों पक्षों की सहमति से लागू होगी। कोर्ट ने बच्चे के भावनात्मक हित को सर्वोपरि मानते हुए पिता को पुलिस या गार्ड न लाने की हिदायत दी है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को है।