मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीसीटी के कारण किसी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और पदोन्नति के बाद रिवर्ट करने की स्थिति भी नहीं बननी चाहिए। मुख्यमंत्री के इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के महासचिव उमाशंकर तिवारी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। यह मुद्दा तब उठा जब सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण कई पदोन्नति प्रक्रियाएं रुक गईं और कुछ आदेश निरस्त कर दिए गए थे।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने मध्य प्रदेश फायर सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस विधेयक पारित किया है। इस नए कानून के तहत फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य आगजनी की घटनाओं की रोकथाम और आपातकालीन राहत कार्यों को प्रभावी बनाना है। विधेयक में एकीकृत फायर सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस के गठन, निदेशालय की स्थापना और आधुनिक फायर स्टेशन बनाने का प्रावधान है। भवन निर्माण से पहले फायर प्लान की मंजूरी और एनओसी अनिवार्य होगी, तथा नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने और कर्मचारियों के लिए जेल या वेतन कटौती का प्रावधान है।