मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच स्वतंत्र इच्छा और बिना प्रलोभन के लंबे समय तक बने संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और आपराधिक प्रकरण को निरस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला शिक्षित, विवाहित थी और उसे पता था कि पति से तलाक के बिना विवाह संभव नहीं है। रिकॉर्ड में ब्लैकमेल या झूठे वादे का कोई साक्ष्य नहीं मिला।