बुलंद सोच, ग्वालियर।

राज्य साइबर पुलिस को चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर ₹21.05 करोड़ की ठगी के मामले में दूसरी बड़ी सफलता मिली है। राज्य साइबर पुलिस ने सागर से रतलाम निवासी अकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया है।
अंकित वर्मा ने ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए भाजपा के जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते का इस्तेमाल किया।
अंकित वर्मा सिर्फ इसी ठगी में शामिल नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के छह राज्यों के म्यूल खातों का बड़ा राजदार है। उसके मोबाइल और लैपटॉप से राज्य साइबर पुलिस को चौंकाने वाले रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी पड़ताल जारी है।
अंकित वर्मा म्यूल खातों की हैंडलिंग कर रहा था, जबकि टेलीग्राम ऐप के माध्यम से विदेश में बैठे सरगना पूरा नेटवर्क चला रहे थे। वह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब राज्यों के म्यूल खातों को हैंडल करता था।
इस मामले में सुराग तब मिला जब राज्य साइबर पुलिस ने शाजापुर से जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता जगदीश कुमार मालवीय निवासी ग्राम सिमरोल, गुलाना, शाजापुर को पकड़ा था।
जगदीश कुमार मालवीय ने सर्व कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति नाम की संस्था का खाता ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए दिया था। गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि उसने सिर्फ खाता उपलब्ध कराया था और इस खाते को अंकित पुत्र रूपचंद्र शर्मा निवासी इंद्रानगर, रतलाम हैंडल कर रहा था, जो बिहार के पटना में बैठकर अकाउंट संचालित करता था।
इसके बाद डीएसपी संजीव नयन शर्मा, निरीक्षक मुकेश नारोलिया, एसआई हिमानी दुबे और आरक्षक पुष्पेंद्र यादव की पुलिस टीम अंकित वर्मा की तलाश में लगी। उसकी लोकेशन सागर में मिली और पुलिस ने उसे वहीं से दबोच लिया।
जगदीश कुमार मालवीय को घर बैठे दो प्रतिशत कमीशन मिलता था, जबकि बाकी पूरा काम अंकित ही करता था। ठगी की रकम आते ही अंकित उसे देशभर के म्यूल खातों में भेज देता था।
आरोपित अंकित पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर है और उसका खुद का वर्कशॉप भी है। वह पिछले करीब डेढ़ साल से म्यूल खातों को हैंडल कर रहा था।
अंकित सबसे पहले टेलीग्राम ऐप से जुड़ा था। उसके पास अच्छा तकनीकी ज्ञान था, इसलिए विदेश में बैठे सरगना ने उसे अकाउंट हैंडलिंग का काम दिया।
म्यूल खातों का रिकॉर्ड अंकित पर रहता था। जैसे ही ठगी की रकम किसी एक खाते में आती थी, वह उसे दूसरे राज्यों के म्यूल खातों में भेजने का काम करता था। वह खाताधारकों को उनका कमीशन भेजता था और बाकी खातों का उपयोग खुद ही करता था।
यह पूरा नेटवर्क एपीके फाइल से संचालित हो रहा था। अंकित खाताधारकों को एपीके फाइल डाउनलोड कराकर एक्सेस ले लेता था, जिससे ओटीपी उसी के पास आते थे।
इससे पुलिस नेटवर्क में उलझ जाती थी, क्योंकि लोकेशन दूसरे राज्य की मिलती थी और खाताधारक दूसरे राज्य में बैठा होता था।
जिला पंचायत सदस्य द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंक खाता छह राज्यों में हुई साइबर ठगी में इस्तेमाल हुआ है। इस खाते में लंबे समय से ठगी का पैसा आ रहा था और ठगी का पैसा फ्रीज होने से पहले ही दूसरे खातों में चला जाता था, यह काम अंकित वर्मा करता था।
राज्य साइबर पुलिस के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि सागर से अकाउंट हैंडलर पकड़ा गया है, जो एपीके फाइल के जरिए खाता संचालित करता था। उन्होंने यह भी बताया कि यही खाता देश के छह राज्यों में हुई साइबर ठगी की अन्य वारदातों में इस्तेमाल हुआ है और आरोपितों से पूछताछ जारी है।

