बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के एक मामले में भाजपा नेता और शाजापुर जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं, जिनमें मालवीय द्वारा ठगी की रकम से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक और फिर मंत्री बनने का सपना देखा जाना शामिल है। मामले में गिरफ्तार दूसरा आरोपी रतलाम निवासी अंकित वर्मा है, जिसे पुलिस ने सागर जिले से गिरफ्तार किया है। डीएसपी राज्य साइबर जोन संजीव नयन शर्मा के अनुसार, अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
जगदीश मालवीय की भूमिका
जांच में जगदीश मालवीय के बैंक खाते में कुछ महीनों में करीब ₹2.93 करोड़ के ट्रांजैक्शन सामने आए हैं। इनमें से करीब ₹50 लाख ग्वालियर के सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से हुई ₹21.05 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, मालवीय ने अपना बैंक खाता अंकित वर्मा को इस्तेमाल करने के लिए दिया था और इसके बदले उसे ट्रांजैक्शन पर 2% कमीशन मिलता था। पुलिस का दावा है कि मालवीय का बैंक खाता देश के छह अलग-अलग राज्यों के लोगों से जुड़ी ठगी की रकम के ट्रांजैक्शन में इस्तेमाल पाया गया है। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है, जिसमें मालवीय के खाते में आए बाकी करीब ₹2.43 करोड़ किन मामलों से जुड़े हैं और रकम के पीछे कौन लोग हैं, इसकी भी जांच शामिल है।

अंकित वर्मा का विवरण
अंकित वर्मा मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई कर चुका है और रतलाम में कार गैराज चलाता है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक, अंकित मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा कार गैराज खोलना चाहता था। आरोप है कि वह साइबर ठगों को म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता था। पुलिस के अनुसार, उसने ठगी की रकम से गैराज बड़ा करने की बात भी स्वीकार की है।
सीए से ठगी का तरीका
सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उन्हें वॉट्सएप के जरिए ‘Tradecboeus’ नाम के प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए तैयार किया गया। पुलिस जांच के अनुसार, निवेशकों को फंसाने के लिए इसी नाम से फर्जी वेब पोर्टल बनाया गया था। पोर्टल पर ट्रेडिंग का ग्राफ जानबूझकर बढ़ता-घटता दिखाया जाता था, ताकि निवेशक को मुनाफे का भरोसा रहे और वह लगातार रकम लगाता जाए। पुलिस के मुताबिक, यह फर्जी प्लेटफॉर्म विदेशी IP से संचालित किया जा रहा था। अशोक विजयवर्गीय ने आरोपियों के झांसे में आकर ₹21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपए निवेश किए। जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने इनकम टैक्स के नाम पर उनसे ₹10 करोड़ और मांगे। इसके बाद उन्हें ठगी का पता चला और उन्होंने पुलिस में शिकायत की।

रकम हस्तांतरण और नेटवर्क का फैलाव
पुलिस जांच में सामने आया कि सीए ने अलग-अलग 76 बैंक खातों में 106 बार ट्रांजैक्शन किए। इसके बाद रकम करीब 15 अलग-अलग लेयर से गुजर कर 20 हजार से ज्यादा बैंक खातों तक पहुंची। शुरुआती जांच के अनुसार, ठगी की करीब 35% रकम दक्षिण भारत के अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हुई। पुलिस इन खातों और रकम के अंतिम लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर साइबर ठगी का नेटवर्क मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के अलावा बिहार, झारखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक तक फैला हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की पुलिस जांच कर रही है।
धोखाधड़ी का तकनीकी तरीका
पुलिस के अनुसार, आरोपी बिहार और मध्य प्रदेश में जाकर मोबाइल में APK फाइल एक्टिवेट करते थे। इसके बाद बैंक से आने वाले ओटीपी ऑटो-फॉरवर्ड होकर मुख्य हैंडलर तक पहुंचते थे। पुलिस इस प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि अंकित वर्मा और उसके नेटवर्क के लोग साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करते थे।


