बुलंद सोच, आलीराजपुर।

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के ग्राम खरपाई में एक आदिवासी समाज के युवक का ग्रामीणों ने गांव के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार नहीं करने दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मृत्यु से पूर्व वह ईसाई धर्म के करीब आ गया था। इसके बाद स्वजन ने निजी भूमि पर अंतिम संस्कार किया।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम ग्राम खरपाई निवासी बोंदर सिंह चौहान (45 वर्ष) की गंभीर बीमारी से मृत्यु हो गई। जब स्वजन अंतिम संस्कार करने मुक्तिधाम पहुंचे, तो ग्रामीण, समाजजन और सरपंच ने इसका विरोध किया। उन्होंने मृत शरीर को जलाने की अनुमति नहीं दी।
ग्रामीणों का आरोप था कि बोंदर सिंह ईसाई धर्म का पालन करता था और आदिवासी संस्कृति के रीति-रिवाजों का पालन नहीं करता था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा शव पर राजनीति की गई।
पुलिस हस्तक्षेप और निजी भूमि पर अंतिम संस्कार
सूचना मिलने पर नानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और विवाद को शांत कराया। विवाद के बाद गांव के सभी लोगों ने मुक्तिधाम से शव को वापस पहुंचाया।
इसके बाद युवक की अपनी निजी जमीन पर शव जलाने का निर्णय लिया गया। शाम तक बोंदर सिंह का शव उसकी अपनी जमीन पर जलाया गया।
परिजनों का बयान
मृतक बोंदर सिंह के चार पुत्र व एक पुत्री हैं। उनके परिजनों का कहना था कि बोंदर सिंह एक वर्ष से गंभीर बीमारी से ग्रसित था।
परिजनों ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “अंतिम संस्कार पर राजनीति कर रहे हो, ऊपर वाला देखेगा।”

