बुलंद सोच, भोपाल।

आयुष्मान भारत योजना में करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर चल रहा निजी अस्पतालों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन (यूपीएचडीए) के बैनर तले प्रदेश के 400 से अधिक निजी अस्पताल पिछले एक माह से हड़ताल पर थे। शासन ने अस्पताल संचालकों की तीनों प्रमुख मांगों पर सहमति व्यक्त की है। यह सहमति बुधवार देर रात स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में बनी।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने बताया कि सबसे बड़ा मुद्दा पोर्टल-1 से संबंधित था, जिसके भुगतान वर्षों से लंबित थे। इस संबंध में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के साथ आधिकारिक पत्राचार शुरू कर दिया गया है। एनएचए से हरी झंडी मिलते ही भुगतान जारी कर दिया जाएगा।
दूसरा मुद्दा पोर्टल-2 का था, जिसमें एक लाख से अधिक क्लेम ऑडिट में लंबित थे। विभाग ने इन क्लेमों के ऑडिट के लिए 50 एमबीबीएस डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की है। इन डॉक्टरों को भोपाल में बैठाकर ऑडिट कराया जाएगा और दो महीने के भीतर सभी क्लेम निपटाने का लिखित आश्वासन दिया गया है।
तीसरा और संवेदनशील मामला नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) प्रमाण पत्र से जुड़ा था। एक अक्टूबर से लगभग 20 अस्पतालों को केवल इसलिए डी-एम्पैनल कर दिया गया था क्योंकि उनके प्रमाण पत्र प्रिंट होकर नहीं आए थे, जबकि उनका निरीक्षण पूरा हो चुका था। अब ऐसे अस्पताल निरीक्षण का ऑनलाइन प्रूफ विभाग में जमा कर सकेंगे, जिसके बाद उन्हें सस्पेंडेड कैटेगरी में स्थानांतरित किया जाएगा। प्रमाण पत्र प्राप्त होते ही भुगतान होल्ड और सस्पेंशन दोनों हटा दिए जाएंगे।
उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा ने जानकारी दी कि एनएबीएच की अनिवार्यता जैसे अन्य मुद्दों पर भी सरकार के साथ बातचीत जारी रहेगी।

