बुलंद सोच, भोपाल।

आयुष्मान योजना के तहत नए एम्पैनलमेंट या किसी विषय में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए आवेदन करने वाले अस्पतालों को अब आवेदन के साथ तीन मिनट का अनकट वीडियो भी देना अनिवार्य होगा। इस वीडियो में अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से शुरू होकर हर सुविधा तक का फिल्मांकन होना आवश्यक है। यह वीडियो एकल, लगातार और बिना किसी कट या एडिट का होना चाहिए।
प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जुड़े अस्पतालों की निगरानी और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ये नए नियम लागू किए गए हैं। राज्य एम्पैनलमेंट कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर अस्पतालों की डिजिटल पहचान, मेडिकल रिकॉर्ड को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ने और नए अस्पतालों की वास्तविक सुविधाओं के सत्यापन से जुड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य योजना में शामिल अस्पतालों और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
मध्य प्रदेश में 1140 सरकारी और 820 निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार किया जाता है। इनमें से 390 अस्पताल एनएबीएच से मान्यता प्राप्त हैं। अनियमितताएं पाए जाने पर जून से अभी तक मध्य प्रदेश के 14 अस्पतालों को आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया गया है।
हेल्थ फैसिलिटी और प्रोफेशनल आईडी अनिवार्य
अब आयुष्मान योजना से सम्बद्ध अस्पतालों के लिए हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) आईडी और वहां काम करने वाले सभी हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) आईडी बनाना अनिवार्य किया गया है। नए अस्पताल को योजना में सम्बद्धता तभी दी जाएगी, जब अस्पताल की एचएफआर आईडी और संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों की एचपीआर आईडी पूरी हो। पहले से योजना में शामिल अस्पतालों को सभी हेल्थ प्रोफेशनल्स की एचपीआर आईडी बनाने के लिए एक माह का समय दिया गया है। इसकी नियमित समीक्षा और निगरानी एबीडीएम शाखा करेगी।
मेडिकल रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण
योजना से जुड़े अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) से जुड़ी अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) लागू करना होगा। इसके साथ ही हितग्राहियों के मेडिकल रिकॉर्ड को भी एबीडीएम इकोसिस्टम से जोड़ना अनिवार्य किया गया है। अस्पतालों को यह व्यवस्था आदेश जारी होने की तारीख से तीन माह के भीतर पूरी करनी होगी। निर्धारित समय में निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अस्पताल एएबीएच इंसेंटिव के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे और उन्हें मिलने वाला इंसेंटिव रोक दिया जाएगा।
जिला स्तर पर भौतिक सत्यापन
नए एम्पैनलमेंट और विशेषज्ञता बढ़ाने के आवेदनों का जिला स्तरीय समिति (डीईसी) के माध्यम से नियमानुसार भौतिक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के बाद रिपोर्ट तैयार कर उसे एचएम पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसमें समिति की अनुशंसा के साथ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की स्पष्ट राय भी दर्ज करनी होगी।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी का बयान
आयुष्मान भारत निरामयम् मध्य प्रदेश के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह ने बताया कि अस्पतालों की डिजिटल पहचान, मेडिकल रिकॉर्ड की डिजिटल लिंकिंग और नए एम्पैनलमेंट में वीडियो सत्यापन से अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जांच को मजबूत किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी सम्बद्ध अस्पतालों को निर्धारित समय सीमा में इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

