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2026-10-17

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ तैयारी के लिए तोड़ा पैतृक घर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को अपने पैतृक घर उज्जैन पहुँचे। उन्होंने घर के बाहर पूजा-अर्चना की और इसके बाद स्वयं गैंती चलाकर मकान का एक हिस्सा तोड़ा।
अपने जन्मस्थान और बचपन की यादों से जुड़े घर को विकास कार्य के लिए समर्पित करते समय मुख्यमंत्री भावुक नज़र आए। डॉ. यादव ने कहा कि जिस घर में जन्म लिया, पले-बढ़े और खेले-कूदे, उसे तोड़ना पड़े तो मन पर असर होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सिंहस्थ के लिए यह आवश्यक है, तो विकास के लिए यह बलिदान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब मिलकर यह काम कर रहे हैं और पूरा देश देख रहा है कि लोग दूसरों की सुविधा के लिए अपने मकान पीछे हटा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस दृष्टि से उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो व्यक्तिगत हितों से परे रहकर नियम, कानून और सुशासन के लिए आवश्यक विषयों को प्राथमिकता देते हैं। डॉ. यादव ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के लोगों ने अपने मकान खुद पीछे हटाए हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि उज्जैन की आबादी लगभग 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ के दौरान लगभग 40 करोड़ लोगों के आने का बोझ रहता है। उन्होंने अपनी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और पारसी समुदायों के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के अपने देवस्थान तक पीछे किए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे सरकार के प्रति विश्वास बनता है और यही उज्जैन का आदर्श है।
दशकों पुरानी पारिवारिक यादों से जुड़े घर के बावजूद, मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ के लिए आवश्यक शहरी बदलाव को सार्वजनिक हित के रूप में देखा। पैतृक मकान का प्रभावित होना उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसके तहत सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन की सड़क, यातायात और शहरी अधोसंरचना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त संपर्क मार्गों में शामिल है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए, मार्ग का चौड़ीकरण यातायात व्यवस्था को सुगम और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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