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2026-08-02

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मध्य प्रदेश के यामिनी मौर्य और अजय बाबू वल्लुरी ने जीते रजत, सरकार देगी 25-25 लाख और सरकारी नौकरी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश के दो खिलाड़ियों, सागर की जूडो स्टार यामिनी मौर्य और भोपाल के वेटलिफ्टर अजय बाबू वल्लुरी ने रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।

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दोनों खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता पर मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ी घोषणा की है। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने ऐलान किया है कि यामिनी और अजय बाबू ने इतिहास रचा है।

राज्य सरकार की खेल नीति के तहत, दोनों पदक विजेताओं को 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और सरकारी विभाग में नौकरी दी जाएगी।

यामिनी मौर्य का प्रदर्शन

सागर जिले के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली यामिनी मौर्य ने महिला 57 किलोग्राम वर्ग जूडो स्पर्धा के फाइनल तक का सफर तय किया।

कड़े मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से हार का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

यामिनी के पिता हरिओम मौर्य खेती करते हैं। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकोच के बावजूद, कोच दीपक रजक ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और परिवार को प्रशिक्षण के लिए राजी किया।

यामिनी के चाचा श्रीनाथ मौर्य ने बताया कि यामिनी ने यह साबित कर दिया है कि अगर बेटियों को अवसर मिले, तो वे देश का सिर ऊंचा कर सकती हैं।

अजय बाबू वल्लुरी का प्रदर्शन

पुरुषों के 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में अजय बाबू वल्लुरी ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक पर कब्जा जमाया।

मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले अजय के पिता भोपाल में पदस्थ हैं, जिस वजह से वे लंबे समय से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

अजय ने स्नैच स्पर्धा में 149 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड कायम किया और शीर्ष पर रहे।

क्लीन एंड जर्क में अजय ने 181 किलोग्राम उठाकर रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि, मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने अंतिम प्रयास में 184 किलोग्राम (कुल 331 किग्रा) उठाकर महज 1 किलोग्राम के अंतर से गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।

भारतीय मुक्केबाजी दल ने पहली बार एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में 7 स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रचा है।

अभावों के बीच सागर की बेटी यामिनी मौर्य की सफलता प्रदेश भर के युवा एथलीटों और बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।