बुलंद सोच, देवास।

न्यायालय ने रिश्तों को शर्मसार करने वाले सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, आरोपी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम प्रसन्नसिंह बहरावत ने विचारण के बाद यह निर्णय पारित किया। कोर्ट ने दो वर्ष में ही इस प्रकरण का निराकरण किया।
आरोपी ने अपनी नाबालिग सौतेली बेटी से लंबे समय तक दुष्कर्म किया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। घटना वर्ष 2024 की है। बालिका अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करती थी।
उसकी मां अपने पिता को छोड़कर आरोपी के साथ रहने लगी थी और बालिका को भी उसे पिता मानकर साथ रहने के लिए कहा था। कुछ दिनों बाद ही सौतेले पिता ने बालिका के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया था और यह वर्षों तक जारी रहा।
इस बीच, बालिका ने अपनी मां, ताऊ और ताई से भी शिकायत की थी, लेकिन सभी ने बालिका की पीड़ा पर कोई ध्यान नहीं दिया। आरोपी लगातार बालिका से दुष्कर्म करता रहा।
जब बालिका गर्भवती हुई, तब यह मामला पुलिस तक पहुंचा। उपसंचालक अभियोजन गोविंद प्रसाद घाटिया ने यह जानकारी दी। आस संस्था को बालिका के गर्भवती होने की सूचना मिली, जिसके बाद संस्था के सदस्य पीड़ित बालिका को लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचे।
सेंटर से परामर्श रिपोर्ट तैयार की गई और बाल कल्याण समिति देवास द्वारा मामले की जांच कराई गई। इसके बाद बरोठा पुलिस ने सौतेले पिता, माता, ताऊ और ताई के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के बाद पुलिस द्वारा चालान विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) देवास में प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आनंद कुमार नेमा ने पैरवी की।

