बुलंद सोच, जबलपुर।

हाई कोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण से जुड़े एक मामले में राज्य शासन से विस्तृत जवाब तलब किया है।
न्यायालय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा गया है।
कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में एक व्हाइट पेपर भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई और पक्षकार
यह आदेश अश्विनी कुमार गुप्ता बनाम मध्य प्रदेश शासन सहित अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पारित हुआ।
पन्ना निवासी याचिकाकर्ता अश्विनी गुप्ता की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखा।
तबादलों की प्रकृति पर विवाद
मामले में मुख्य विवाद ग्राम रोजगार सहायक के पद की स्थानांतरणीय प्रकृति को लेकर है।
शासन की नीति में इस पद को स्थानांतरणीय बताया गया है, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि ग्राम रोजगार सहायक का पद गैर स्थानांतरणीय है।
राज्य शासन की ओर से पूर्व में पारित आदेश का हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से 13 जुलाई, 2026 को पारित एक आदेश का उल्लेख किया गया, जिसमें समान परिस्थितियों में तबादला आदेश पर रोक लगाई गई थी।
प्रमुख सचिव को शपथ-पत्र के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से विस्तृत शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने विभाग से स्पष्ट करने को कहा कि ग्राम रोजगार सहायकों के तबादले किस नीति, प्रक्रिया और अधिकार के तहत किए जा रहे हैं।
तबादला आदेश पर रोक जारी
हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक विवादित तबादला आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक जारी रखी है।
मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को होगी।

