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2026-07-29

हमीदिया अस्पताल ने 13 वर्षीय अभि को ‘गिलियन-बैरे सिंड्रोम’ से बचाया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

सागर के 13 वर्षीय अभि ने एक गंभीर बीमारी से साढ़े तीन महीने की लंबी लड़ाई के बाद जीत हासिल की है। उसे 13 अप्रैल 2026 को गंभीर हालत में सागर से रेफर कर हमीदिया अस्पताल, भोपाल लाया गया था।

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जांच में पता चला कि अभि गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से पीड़ित था, जिसमें शरीर की नसें कमजोर हो जाती हैं। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसके दोनों हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया था और सांस लेने वाली मांसपेशियां भी निष्क्रिय हो गई थीं।

जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने अभि को तुरंत वेंटिलेटर पर रखा। उसे इम्यूनोग्लोबुलिन के इंजेक्शन दिए गए और लंबे समय तक सांस देने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी भी की गई।

इलाज के दौरान अभि को निमोनिया भी हो गया। इसके बावजूद, विभागाध्यक्ष डॉ. मंजूषा गोयल के नेतृत्व में डॉ. राजेश टिक्कस, डॉ. रश्मि रंधा, डॉ. भारती, डॉ. नवनीत खंडेलवाल और नर्सिंग स्टाफ ने दिन-रात मेहनत की।

लगभग 48 दिन बाद, 29 मई को अभि को वेंटिलेटर से हटाया जा सका और धीरे-धीरे उसकी मांसपेशियों में ताकत लौटने लगी। करीब साढ़े तीन महीने के उपचार के बाद अब उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। उसे आगे घर पर फिजियोथेरेपी और नियमित जांच करानी होगी।

अभि के पिता का पहले ही निधन हो चुका है, और उसकी मां तथा भाई ने पूरे समय हिम्मत बनाए रखी। आयुष्मान भारत योजना के तहत उसका पूरा इलाज निशुल्क हुआ। जीएमसी की डीन डॉ. कविता एन सिंह और अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी अस्पतालों में भी गंभीर बीमारियों का उच्चस्तरीय इलाज संभव है।