बुलंद सोच, इंदौर।
शहर में लगातार कम होती हरियाली चिंता का विषय है, खासकर नई कॉलोनियों के बसने और खाली जमीन पर निर्माण कार्यों के कारण। इस स्थिति में जहां एक ओर पौधारोपण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं कुछ नागरिक अपने घरों में ही हरियाली बचाने के रास्ते तलाश रहे हैं।
इनमें से कुछ ने अपने आंगन का बड़ा हिस्सा पेड़-पौधों के लिए छोड़ा है, जबकि कुछ अन्य ने अपनी छत और बालकनी को बगीचे में बदल दिया है। कई लोगों ने अपने घरों में फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे लगाए हैं। कुछ घरों में पक्षियों के लिए पानी और दाना रखने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे विभिन्न प्रकार के पक्षी आकर्षित होते हैं। इन घरों में सुबह पक्षियों की आवाज सुनाई देती है और मौसम के अनुसार तितलियां भी दिखाई देती हैं।
आंगन को बनाया हरित क्षेत्र
सुपर कॉरिडोर क्षेत्र निवासी राजेश राठी ने अपने घर के आगे और पीछे का हिस्सा पौधों के लिए आरक्षित रखा है। घर बनाते समय उन्होंने तय किया था कि वे पूरे परिसर को सीमेंट से नहीं भरेंगे। वर्तमान में उनके घर में लगभग 80 प्रकार के पौधे हैं, जिनमें आम और नींबू जैसे फलदार पेड़ शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, गुलाब, मोगरा और चमेली जैसे फूलों के पौधे तथा तुलसी, एलोवेरा और गिलोय जैसे औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं। राजेश राठी ने पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी और दाना रखने की व्यवस्था की है, जिसके परिणामस्वरूप गौरैया जैसे पक्षी नियमित रूप से उनके घर आते हैं। परिवार के सभी सदस्य प्रतिदिन कुछ समय पौधों की देखभाल में लगाते हैं।
राजेश राठी के अनुसार, पौधों के कारण उनके घर का तापमान आसपास के घरों की तुलना में कम रहता है और गर्मियों में भी आंगन में ठंडक महसूस होती है।
छत पर तैयार किया हरा-भरा बगीचा
विजय नगर निवासी सीमा लक्ष्यसेन ने अपनी पूरी छत को एक बगीचे का रूप दिया है। उन्होंने कुछ गमलों से शुरुआत की थी, लेकिन अब उनकी छत पर लगभग 250 गमले हैं। इन गमलों में मौसमी सब्जियां जैसे धनिया, पुदीना, टमाटर, मिर्च, बैंगन और पालक भी उगाई जाती हैं।
फूलों के साथ-साथ कई सजावटी पौधे भी लगाए गए हैं, और बेल वाले पौधों के लिए जाली की व्यवस्था की गई है। सीमा लक्ष्यसेन रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे से खाद तैयार करती हैं, जिसका उपयोग पौधों में किया जाता है। गर्मियों में पक्षियों के लिए छोटी-छोटी कटोरियों में पानी रखा जाता है।
उनकी छत पर अक्सर तितलियां और मधुमक्खियां दिखाई देती हैं। सीमा लक्ष्यसेन के अनुसार, आसपास के कई लोगों ने उनकी छत पर बने बगीचे को देखकर अपने घरों में भी बगीचे बनाना शुरू किया है।
घर के चारों ओर लगाए देशी पेड़
सुदामा नगर निवासी अनिल जैन ने अपने घर के पीछे के हिस्से को एक बगीचे में बदला है। पहले घर का यह हिस्सा खुला और पक्का बना हुआ था। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने टाइल्स हटवाकर वहां काली मिट्टी डलवाई और विभिन्न प्रकार के पौधे लगाकर उसे बगीचे का स्वरूप दिया।
इस बगीचे में सब्जियों और फूलों के पौधे शामिल हैं, और खाली जगह में घास तथा छोटे पौधे भी लगाए गए हैं ताकि मिट्टी खुली रहे। उन्होंने वर्षा का पानी जमीन में उतारने की व्यवस्था भी की है, जिससे पेड़ों को पर्याप्त नमी मिलती रहती है।
अनिल जैन ने घर में प्लास्टिक के गमलों की जगह मिट्टी के गमलों का उपयोग किया है। उनके बगीचे में कई तरह की तितलियां और छोटे पक्षी दिखाई देते हैं।
छोटे घर में भी निकाली हरियाली की जगह
एयरपोर्ट क्षेत्र निवासी दिव्या माथुर का घर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन उन्होंने हर खाली कोने का उपयोग पौधों के लिए किया है। बालकनी, सीढ़ियों के पास और खिड़कियों के बाहर हैंगिंग पॉट लगाए गए हैं।
दीवार पर एक वर्टिकल गार्डन भी तैयार किया गया है, जिसमें अलग-अलग तरह के सजावटी और औषधीय पौधे लगे हैं। उनके घर में लगभग 150 पौधे हैं। उन्होंने छोटे-छोटे पानी के बर्तन भी रखे हैं, जहां गर्मियों में पक्षी पानी पीने आते हैं।
पौधों की सिंचाई के लिए बचा हुआ साफ पानी उपयोग किया जाता है ताकि पानी की बचत हो सके। आसपास की महिलाओं ने भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने घरों में पौधे लगाने शुरू किए हैं।

