बुलंद सोच, इंदौर।
शहर के महाराणा प्रताप नगर स्थित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका दर्ज की थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर शासन ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम सामाजिक न्याय विभाग की अनुमति के बगैर संचालित हो रहा था और यह अवैध आश्रम नगर निगम के सामुदायिक भवन में चल रहा था। स्टेटस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भवन का कोई आवंटन नहीं हुआ था, बल्कि एक पूर्व पार्षद के मौखिक निर्देश पर इसे आश्रम के लिए दे दिया गया था; हालांकि, निगमायुक्त से भवन आवंटन या अवैध कब्जे के बारे में जानकारी मांगी गई है। आश्रम के पास केवल फर्म एंड सोसायटी का पंजीयन मिला, जो 27 नवंबर 2024 को कराया गया था। शासन ने कोर्ट को बताया कि मामला सामने आने के बाद प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्गों को अन्य शासकीय वृद्धाश्रमों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
कोर्ट के निर्देश
कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिए कि अगली सुनवाई पर इंदौर और आसपास के जिलों में संचालित वृद्धाश्रमों की संख्या, उनकी क्षमता, वर्तमान में रह रहे बुजुर्गों की संख्या और उनकी स्थिति की जानकारी दी जाए। बुजुर्गों को जिन वृद्धाश्रमों में भेजा गया है, उनकी क्षमता और वहां रह रहे वृद्धों की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगने पर, शासकीय वकील ने जानकारी देने के लिए समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) सचिव को उन सभी वृद्धाश्रमों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए, जहाँ प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को स्थानांतरित किया गया है। डालसा सचिव को निरीक्षण के बाद वहां रह रहे बुजुर्गों की स्थिति और उन्हें मिल रही सुविधाओं की पूरी रिपोर्ट अगली सुनवाई के पूर्व हाई कोर्ट में पेश करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है।
मामले का विस्तृत विवरण
महाराणा प्रताप नगर में संचालित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की डंडे से पिटाई का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुआ था। प्रशासन ने जांच शुरू की तो पता चला कि आश्रम का संचालन महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसायटी द्वारा किया जा रहा था, लेकिन संस्था के पास पंजीयन और वृद्धाश्रम संचालन के लिए आवश्यक अनुमति और दस्तावेज नहीं थे। इस आश्रम में रह रहे 31 बुजुर्गों को अन्य आश्रमों में स्थानांतरित किया गया था।
निगम की कार्यप्रणाली पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि आश्रम को सामुदायिक भवन आवंटन की कोई प्रक्रिया ही नहीं की गई थी और एक पूर्व पार्षद के मौखिक निर्देश पर भवन सौंप दिया गया था। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम में मौखिक काम कैसे हो जाते हैं, और इससे पहले भी पाइपलाइन विस्फोट मामले में एक पार्षद के मौखिक निर्देश पर बोरिंग मशीन मौके पर पहुंचने की बात सामने आई थी।
नगर निगम की कार्रवाई
सोमवार को नगर निगम ने प्रेमाश्रय आश्रम के आसपास बनाई गई अवैध दीवारों को हटा दिया। सहायक रिमूवल अधिकारी बबलू कल्याणे ने बताया कि आश्रम के चारों तरफ दीवारें बनाई गई थीं, और निगम की टीम ने आश्रम खाली कराने व दीवारें हटाने के बाद इसका कब्जा जोनल अधिकारी को सौंप दिया।
सेवाधाम आश्रम से संबंधित जांच
17 बच्चों की मौत के मामले में हाई कोर्ट का जांच दल सेवाधाम आश्रम पहुंचा और आश्रम के रिकॉर्ड देखे; इस मामले की रिपोर्ट 12 मार्च को पेश की जाएगी।

