बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर हाई कोर्ट ने एमआर-फोर से लगी लक्ष्मीपुर बस्ती में रह रहे लगभग 200 से 250 परिवारों को हटाने से संबंधित मामले में अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट ने यह निर्णय जबलपुर नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण, केसरवानी शिक्षा समिति तथा बस्ती के रहवासियों का पक्ष सुनने के बाद लिया।
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष हस्तक्षेपकर्ताओं (बस्ती के रहवासियों) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर और अधिवक्ता रविंद्र कुमार गुप्ता ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि लक्ष्मीपुर की लगभग आठ हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण वर्ष 1990 में किया गया था।
अधिवक्ताओं ने बताया कि क्षेत्र में पहले से रह रहे कई परिवारों को वर्ष 1998 में नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन अधिनियम के तहत 28 वर्ष की पट्टेदारी दी गई थी। उनका तर्क था कि वर्तमान में यहां लगभग 200 से 250 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें पट्टाधारी परिवार भी शामिल हैं।
हस्तक्षेपकर्ताओं ने कहा कि बिना सुनवाई, पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए इन परिवारों को हटाया नहीं जा सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में बस्ती खाली कराने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने बिजली काटने और अतिक्रमण हटाने की तैयारी की थी। हाई कोर्ट के समक्ष मामला आने के बाद यह कार्रवाई रोक दी गई थी।
हस्तक्षेपकर्ताओं का कहना था कि पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

