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2026-10-17

मध्य प्रदेश: निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को 7500 रुपये मासिक छात्रवृत्ति

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, नई दिल्ली।

मध्य प्रदेश सरकार भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बना रही है।

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‘भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना’ के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को प्रति माह 7,500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी।

इस आर्थिक मदद का उपयोग छात्र अपनी ट्यूशन फीस, अध्ययन सामग्री, हॉस्टल खर्च, आवागमन तथा NEET, JEE एवं CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग के लिए कर सकेंगे।

शुरुआती दौर में इस योजना के माध्यम से 600 मेधावी विद्यार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए विस्तृत प्रारूप तैयार कर लिया गया है।

प्रथम चरण में 600 मेधावी विद्यार्थियों का चयन

योजना के शुरुआती चरण में कुल 600 योग्य विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा।

इनमें से 500 छात्रों का चयन ‘भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ तथा 100 छात्रों का चयन ‘श्रमिक कल्याण बोर्ड’ के माध्यम से किया जाएगा।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जा रही इस योजना की सफलता और समीक्षा के आधार पर भविष्य में लाभार्थियों की संख्या और कट-ऑफ अंकों में परिवर्तन किया जाएगा।

पात्रता की शर्तें

इस छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक का नियमित विद्यार्थी होना आवश्यक है।

साथ ही, विद्यार्थी के माता-पिता का निर्माण श्रमिक के रूप में संबंधित मंडल में वैध पंजीकरण होना चाहिए और उन्होंने कम से कम 90 दिनों तक कार्य किया हो।

इसके अतिरिक्त, विद्यार्थी ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में न्यूनतम 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों।

चयन प्रक्रिया और आरक्षण

लाभार्थियों का चयन मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) और CBSE की साझा मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा।

प्रतिवर्ष अधिकतम 500 नए विद्यार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा, जिसमें 20 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं।

योजना का लाभ निरंतर प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी को कक्षा 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा।

उच्च शिक्षा और कोचिंग के खर्च होंगे आसान

इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर निर्माण श्रमिकों के प्रतिभाशाली बच्चों को पैसों की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने से रोकना है।

छात्रवृत्ति की राशि से विद्यार्थी अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बिना किसी वित्तीय तनाव के कर सकेंगे।