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2026-08-10

गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों में मिलेगी मुफ्त सोनोग्राफी सुविधा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल में अब गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी जांच के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन खराब है या संबंधित डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी सोनोग्राफी निजी सेंटरों में पूरी तरह मुफ्त कराई जाएगी।

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सरकारी खर्च पर सुविधा

इस सुविधा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।

डिजिटल और कैशलेस प्रणाली

इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल और कैशलेस बनाया गया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

सोनोग्राफी रेफरल प्रक्रिया

सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ, पीजीएमओ या मेडिकल ऑफिसर ओपीडी में जांच के बाद सोनोग्राफी की सलाह देंगे। इसके उपरांत, महिला के मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से एक ई-वाउचर भेजा जाएगा। इस ई-वाउचर का उपयोग कर महिला सात दिनों के भीतर किसी भी अधिकृत निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जाकर अपनी मुफ्त जांच करवा सकेगी। आपातकाल की स्थिति में एक गर्भवती महिला की अधिकतम दो बार तक सोनोग्राफी कराई जा सकेगी।

लक्ष्य और विस्तार

यह सुविधा विशेष रूप से उन जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए है जहां सरकारी सोनोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं या वे लंबे अवकाश पर हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत चिन्हित सभी स्वास्थ्य संस्थाओं से भी रेफरल किया जा सकेगा। यह योजना पूरे प्रदेश में लागू है।

ऑनलाइन रिपोर्टिंग और भुगतान

निजी सेंटरों में होने वाली प्रत्येक सोनोग्राफी की रिपोर्ट और मरीज की जानकारी ओडीके ऐप के माध्यम से सीधे ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। इससे रिपोर्ट में हेराफेरी की संभावना नहीं रहेगी। भुगतान के लिए सुमन यूएसजी पोर्टल तैयार किया गया है। निजी सेंटर संचालक को अपना बैंक खाता, आईएफएससी कोड और मोबाइल नंबर पोर्टल पर दर्ज करना होगा। जांच के बाद सेंटर द्वारा ई-वाउचर बनाया जाएगा, जिसे अस्पताल द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। अनुमोदन के पश्चात, प्रति केस 500 रुपये का भुगतान सीधे सेंटर के खाते में स्पर्श पोर्टल के जरिए कर दिया जाएगा।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य को लाभ

गर्भावस्था के दौरान समय पर सोनोग्राफी से मां और बच्चे को होने वाले खतरों तथा बीमारियों की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाएगी। इससे उन्हें समय पर उपचार मिलेगा और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी।

प्रशिक्षण और कार्यान्वयन

इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सीएमएचओ कार्यालय भोपाल ने निजी सोनोलॉजिस्टों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। उन्हें ई-वाउचर बनाने, रिकॉर्ड रखने और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

सीएमएचओ का वक्तव्य

भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि सुमन यूएसजी पोर्टल पर गर्भवती की सोनोग्राफी की विशेष फाइंडिंग्स देखकर गर्भावस्था के जोखिमों की जानकारी लेना अब आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल सिस्टम से महिलाएं समय पर मुफ्त जांच करवा सकेंगी और मरीज का पूरा रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध होगा। डॉ. शर्मा ने निजी सेंटरों के सहयोग से हर महिला तक यह सुविधा पहुंचाने की बात कही।

स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी

एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत, डॉक्टरों की एक विशेष टीम एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की तर्ज पर कार्य करेगी, जो भोपाल से पूरे मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर नजर रखेगी।