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2026-10-17

पन्ना में प्लास्टिक कचरे से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार, बन रहे उपयोगी उत्पाद

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के वन गांवों में पहले झाड़ियों और जंगल के किनारे दिखने वाला प्लास्टिक अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन गया है। इस कचरे से, जिससे वन्यजीवों को खतरा होता था, महिलाएं सफाई के बाद उसे संसाधित कर बैग, फोल्डर, स्टेशनरी और स्मृति चिन्ह जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को पर्यटक यादगार के तौर पर अपने साथ ले जा रहे हैं।

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प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस

मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने वर्ष 2022 में पन्ना पार्क में ‘प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस’ शुरू किया था। इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ते प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए केवल समय-समय पर सफाई अभियान चलाना नहीं, बल्कि एक स्थायी और सामुदायिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था स्थापित करना था। यह पहल 14 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों में लागू की गई है। अब तक इन क्षेत्रों से 45 टन से अधिक कचरा एकत्र कर उसकी छंटाई और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग की जा चुकी है।

प्लास्टिक से उत्पाद निर्माण प्रक्रिया

कचरे की छंटाई के बाद, लगभग 42 प्रतिशत गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक इकोकारी को भेजा जाता है। इकोकारी एक सामाजिक उद्यम है जो प्लास्टिक को उपयोगी सामग्री में बदलने का कार्य करता है। इसके बाद, गांवों की वर्कशॉप में महिलाएं संसाधित प्लास्टिक से विभिन्न उत्पाद तैयार करती हैं। इस प्रक्रिया में पारंपरिक चरखे और हथकरघे का उपयोग किया जाता है, जिससे प्लास्टिक कचरे को उत्पाद में बदलने के साथ-साथ पारंपरिक कारीगरी को भी एक नए पर्यावरणीय उद्देश्य से जोड़ा गया है।

महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता

इस परियोजना का लक्ष्य केवल महिलाओं को काम या वेतन उपलब्ध कराना नहीं है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं। वहीं, पर्यटकों के लिए तैयार किए गए स्मृति चिन्ह पन्ना के जंगलों और उन समुदायों से जुड़ी यादें बन रहे हैं, जो इनके संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। इस मॉडल में पर्यटन से उत्पन्न होने वाला कचरा उसी गंतव्य के आसपास एकत्र किया जाता है, फिर उसे स्थानीय स्तर पर अलग कर संसाधित किया जाता है, और पारंपरिक शिल्प के माध्यम से नए उत्पादों में बदला जाता है। इसके बाद वही उत्पाद पर्यटन अर्थव्यवस्था में वापस पहुंचता है।

मॉडल का विस्तार और ग्रामीण पर्यटन

पन्ना में शुरू हुआ यह प्रयोग अब आगे बढ़ चुका है। वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश ने इस मॉडल को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों तक विस्तारित किया। राज्य का ग्रामीण पर्यटन मिशन अब 100 से अधिक गांवों को कवर करता है और 300 से अधिक महिलाओं के स्वामित्व वाले होमस्टे और नेचर भ्रमण स्थलों को समर्थन दे रहा है। इसमें प्राणपुर भी शामिल है, जिसे भारत के पहले हथकरघा शिल्प गांव के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां महिलाएं हथकरघा कैफे भी संचालित करती हैं।

SKOCH सिल्वर अवार्ड और ESG फ्रेमवर्क

इस परियोजना को वर्ष 2025 में स्वच्छ वातावरण के लिए SKOCH सिल्वर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। राज्य सरकार ने उद्योग मानकों के अनुरूप पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) फ्रेमवर्क अपनाने का भी उल्लेख किया है। मध्य प्रदेश की जिम्मेदार पर्यटन रणनीति में प्लास्टिक-मुक्त वन्यजीव क्षेत्र, इलेक्ट्रिक-व्हीकल मोबिलिटी, कम-कार्बन आर्किटेक्चर और सामुदायिक आजीविका को एक साथ जोड़ा जा रहा है। ऐसे में पन्ना का मॉडल केवल एक सफाई अभियान नहीं, बल्कि संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली एक पहल के रूप में सामने आ रहा है।