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2026-10-17

भोपाल नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में 7951 संपत्तियों का हिसाब दिया, पहले 62 हजार चिह्नित करने का दावा था

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों वाली संपत्तियों की पहचान संबंधी जानकारी में विरोधाभास प्रस्तुत किया है। 5 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद निगम के अधिकारियों ने दावा किया था कि शहर में 62 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां चिह्नित की गई हैं जहाँ आवासीय उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।

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इस बड़े आंकड़े को निगम की कार्रवाई के दायरे के रूप में बताया गया था, जिससे शहर के व्यापारियों में बड़े स्तर पर कार्रवाई को लेकर डर का माहौल बन गया था। हालांकि, 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत शपथपत्र में निगम ने केवल 7,951 मामलों की पहचान कर नियम-11 के तहत नोटिस जारी करने की जानकारी दी है।

इस प्रकार, निगम द्वारा 62 हजार से अधिक संपत्तियों तक पहुंचने का दावा किया गया सर्वेक्षण, अदालत के समक्ष पेश किए गए रिकॉर्ड में एक बड़ा हिस्सा गायब दिखाता है।

कार्रवाई के आंकड़ों में विसंगति

निगम ने शपथपत्र में 190 परिसरों को अनधिकृत उपयोग के कारण बंद और सील करने की जानकारी दी है। जबकि हकीकत में निगम ने शहर में केवल सात प्रतिष्ठान सील किए थे और 183 प्रतिष्ठानों को स्वेच्छा से बंद करने के पंचनामे बनाए थे।

शपथपत्र के एक अन्य हिस्से में 170 परिसरों को बंद किए जाने तथा उनमें से 165 को स्वीकृत अधिभोग के अनुरूप पाए जाने पर बहाल करने और पांच को सील रखने की जानकारी भी दी गई है।

अवैध निर्माण पर कार्रवाई

आवासीय उपयोग के उल्लंघन के अलावा, निगम ने बिना भवन अनुमति या स्वीकृत अनुमति के विपरीत निर्माण के 296 मामले भी चिह्नित किए हैं। इन मामलों में 302(1) के तहत 160 और 307(2) के तहत 163 नोटिस जारी किए गए।

कुल 124 मामलों में सुनवाई के बाद आदेश पारित किए गए और 75 मामलों में अवैध निर्माण या अतिक्रमण हटाया गया।

लोटस इलेक्ट्रानिक्स पर कार्रवाई लंबित

अरेरा कॉलोनी स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठान लोटस इलेक्ट्रानिक्स को नगर निगम ने 2019 में नोटिस जारी किया था। इसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहाँ कोर्ट ने कार्रवाई से पहले 15 दिन का समय दिया था।

यह 15 दिन की अवधि लगभग तीन साल पहले ही पूरी हो चुकी है, फिर भी नगर निगम ने इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

जोनवार नोटिस और कुल संख्या में अंतर

निगम द्वारा जारी जोनवार नोटिस के आंकड़े इस प्रकार हैं: जोन एक-280, दो-197, तीन-242, चार-234, पांच-620, छह-184, सात-348, आठ-603, नौ-264, दस-456, ग्यारह-336, बारह-520, तेरह-619, चौदह-209, पंद्रह-569, सोलह-415, सत्रह-440, अठारह-464, उन्नीस-362, बीस-377, इक्कीस-212। इन सभी का जोड़ 7617 होता है।

हालांकि, शपथपत्र में कुल 7,951 नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई है, जिससे जोनवार आंकड़ों के जोड़ और शपथपत्र में बताई गई कुल संख्या में अंतर दिखाई देता है।

जर्जर मकानों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

दिल्ली के सत्य निकेतन में भवन गिरने से सात लोगों की मौत और 12 के घायल होने की घटना के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भवनों की सुरक्षा और पूर्व में दिए निर्देशों के पालन को लेकर सख्ती दिखाई है।

न्यायालय ने संबंधित सभी पक्षों से पूर्व के आदेशों के पालन पर शपथपत्र और रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में अब नगर निगम को जर्जर मकानों की स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई के संबंध में जानकारी देनी होगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर दो बजे निर्धारित है।