बुलंद सोच, रीवा।

रीवा में ऐतिहासिक कोल गढ़ी के जीर्णोद्धार कार्य में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे इस निर्माण कार्य की पोल पहली ही बरसात में खुल गई। गढ़ी की नई बनी बाउंड्री वॉल गिरकर धराशायी हो गई। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
घटिया सामग्री के आरोप
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा शुरू से ही घटिया स्तर की गिट्टी, बालू और सीमेंट का उपयोग किया जा रहा था। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
पूर्व विधायक की चेतावनी और प्रशासनिक अनदेखी
भाजपा के पूर्व विधायक श्याम लाल द्विवेदी ने लगभग एक महीने पहले कोल गढ़ी के जीर्णोद्धार स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण में अनियमितता और घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया था। पूर्व विधायक ने तत्काल रीवा कलेक्टर को पत्र लिखकर निर्माण कार्य का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी धन की बर्बादी होगी और भविष्य में कोई हादसा हो सकता है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर किसी ने भी इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। अब पहली बरसात में ही बाउंड्री वॉल गिरने से उनके आरोप सही साबित हुए हैं।
पारदर्शिता का अभाव और भ्रष्टाचार की आशंका
सूत्रों के अनुसार, कोल गढ़ी के जीर्णोद्धार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नियम के अनुसार, हर सरकारी निर्माण स्थल पर लागत राशि, काम की अवधि और ठेकेदार का नाम लिखा हुआ बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन कोल गढ़ी में आज तक ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है। स्थानीय लोग और पर्यटक भी यह नहीं जान पा रहे हैं कि आखिर यह काम कितने करोड़ में हो रहा है और यह किस विभाग के अधीन है। पारदर्शिता के अभाव में भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल हो रही गिट्टी में मिट्टी मिली हुई है और बालू भी मानक के अनुसार नहीं है। दीवारों में सीमेंट कम और रेत ज्यादा दिख रही थी, इसी वजह से बाउंड्री वॉल बरसात का दबाव सहन नहीं कर पाई।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और जांच की मांग
कोल गढ़ी रीवा जिले की एक धरोहर है और बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। स्थानीय लोगों में घटना के बाद आक्रोश है। उनका कहना है कि “टैक्स का पैसा लूटा जा रहा है। कागजों में अच्छा काम दिखाया जाएगा और हकीकत में सब गिर जाएगा।” अब तक पीडब्ल्यूडी, पुरातत्व विभाग या जिला प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं किया है और न ही गिरे हुए हिस्से को लेकर कोई जांच कमेटी बनाई गई है। पूर्व विधायक श्याम लाल द्विवेदी ने एक बार फिर मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की थर्ड पार्टी जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

