बुलंद सोच।
देश के पांच लाख से अधिक आबादी वाले 45 शहरों को यातायात जाम से राहत दिलाने के लिए रिंग रोड या बाईपास बनाए जाएंगे। कुछ शहरों में मौजूदा राजमार्गों को चौड़ा किया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इन शहरों के लिए कुल दो लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार की हैं। चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा।
केंद्र सरकार ने पांच लाख से अधिक आबादी वाले कुल 83 शहरों को यातायात जाम मुक्त बनाने के लिए चिह्नित किया है। इन शहरों में बाईपास, रिंग रोड या राजमार्गों को चौड़ा करने की योजना है। इनमें से तीन शहरों में राजमार्ग का काम पहले ही पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, 35 अन्य शहरों में रिंग रोड या बाईपास के लिए स्वीकृति मिल चुकी है अथवा प्रक्रिया चल रही है।
उत्तर प्रदेश के शहरों के लिए परियोजनाएं
इस योजना में उत्तर प्रदेश के तीन शहर वाराणसी, प्रयागराज और अलीगढ़ भी शामिल हैं। इन तीनों शहरों को जाम से राहत दिलाने के लिए कुल 12,500 करोड़ रुपये की परियोजनाएं बनाई गई हैं। संबंधित परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इनकी निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अलीगढ़ में अलीगढ़-मुरादाबाद और अलीगढ़ रिंग रोड बनाने की योजना है। इस पर अनुमानित 1,450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
प्रयागराज में रिंग रोड का पहले चरण का काम शुरू हो चुका है। अब इसका दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिस पर करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
वाराणसी के लिए 5,000 करोड़ रुपये की लागत से रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव है।
अन्य प्रमुख शहरों की परियोजनाएं
45 शहरों की इस सूची में देहरादून रिंग रोड-ईस्टर्न बाईपास भी शामिल है, जिस पर अनुमानित 1,715 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चंडीगढ़ में ओल्ड एयरपोर्ट चौक, हालो माजरा टी-प्वाइंट और राजमार्ग 5 पर पोल्ट्री फार्म चौक पर 350 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
दिल्ली के लिए सात परियोजनाएं तैयार की गई हैं, जिन पर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

