बुलंद सोच, भोपाल।

स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित लंबित मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को भोपाल के नीलम पार्क में तीसरे दिन भी जारी रहा। तीसरे दिन ग्वालियर और चंबल संभाग से बड़ी संख्या में शिक्षक धरना स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। शिक्षकों ने कहा कि वर्षों की सेवा के बाद टीईटी परीक्षा अनिवार्य करना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है। आंदोलनरत शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। इसके अतिरिक्त, अव्यवहारिक ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त करने, नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना तथा अन्य लंबित मांगों के निराकरण की भी मांग की गई। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संयोजक जगदीश यादव ने धरने को संबोधित करते हुए शिक्षकों से टीईटी परीक्षा के फॉर्म नहीं भरने और अपनी मांगों के लिए एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष की सेवा लेने के बाद अब शिक्षकों से परीक्षा लेना उचित नहीं है, और शिक्षक इसका विरोध व बहिष्कार जारी रखेंगे। ग्वालियर-चंबल संभाग से आए शिक्षकों ने बताया कि यह मामला केवल टीईटी परीक्षा का नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सम्मान, वरिष्ठता और सेवा अधिकारों से भी जुड़ा है। मोर्चा पदाधिकारियों राकेश दुबे, राजेश नायक, डीके सिंगोर और राकेश पटेल सहित अन्य ने शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। पदाधिकारियों ने अलग-अलग संभागों से अधिक से अधिक शिक्षकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।
राज्य सरकार पर बढ़ा कर्ज
इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जिसके बाद राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा 5.42 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

