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2026-10-17

भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने का रास्ता

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल मास्टर प्लान 2047 के नए ड्राफ्ट में आवासीय क्षेत्रों में धड़ल्ले से चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को चुपके से नियमित करने का रास्ता निकाला गया है। जबकि वर्ष 1995 के प्लान में अवैध गतिविधियों को हटाकर दूसरी तरह शिफ्ट करने का प्रावधान था। नए ड्राफ्ट में धारा 15.38.1 में ऐसा विशेष प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिसके जरिए आवासीय क्षेत्रों में चल रही गैर-आवासीय गतिविधियों को शर्तों के साथ वैध किया जा सकेगा। अब यह सवाल उठ रहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट आवासीय कॉलोनियों में अवैध कमर्शियल गतिविधियों पर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है, तब क्या नए मास्टर प्लान का यह फार्मूला नियम-विरुद्ध निर्माणों पर कानूनी पर्दा डालने का काम करेगा। विशेषज्ञों की माने तो यदि कोई संपत्ति उक्त तीन शर्तों को पूरा करती है तो उसे आवासीय से व्यावसायिक श्रेणी में बदला जा सकेगा। हालांकि, इसमें स्पष्ट किया गया है कि अनधिकृत कॉलोनियों, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और ग्रीन बेल्ट, तालाब या सरकारी सड़कों की जमीन पर बने कब्जों को यह राहत नहीं मिलेगी।

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धारा 15.38.1 की शर्तें

मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप में आवासीय से व्यावसायिक में बदलाव के लिए तीन मुख्य शर्तें तय की गई हैं। संबंधित व्यावसायिक गतिविधि मास्टर प्लान प्रारूप के प्रकाशन से पहले से संचालित हो रही हो। उस संपत्ति का संपत्ति कर गैर-आवासीय यानी कमर्शियल दर पर जमा किया जा रहा हो। परिसर में कमर्शियल बिजली कनेक्शन लगा होना अनिवार्य है।

1995 के मास्टर प्लान से तुलना

वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में शहर को व्यवस्थित रखने के लिए आवासीय इलाकों से आरा मशीन, लकड़ी मंडी और धोबीघाट जैसी गतिविधियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने का स्पष्ट विजन था। उस समय किसी अवैध गतिविधि को उसी जगह नियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके विपरीत, नए प्रारूप में नियमों का उल्लंघन कर बने प्रतिष्ठानों को शर्तों के साथ अपनी जगह पर ही बने रहने की छूट दी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय और चिंताएं

शहरी मामलों के विशेषज्ञ प्रो. एच.एम. मिश्रा ने बताया कि 1995 की योजना में अनधिकृत निर्माणों को सामान्य रूप से नियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं थी, बल्कि तय गतिविधियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता था। उन्होंने कहा कि 2047 के नए प्रारूप में शर्तों के साथ पुराने उपयोगों को उसी जगह जारी रखने की छूट देने का प्रस्ताव है। प्रो. मिश्रा ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही आवासीय क्षेत्रों में मनमानी व्यावसायिक गतिविधियों और सील इमारतों को दोबारा खोले जाने पर गहरी चिंता जता चुका है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या नई योजना भविष्य के विकास की दिशा तय कर रही है या सिर्फ पुराने नियम-विरुद्ध उपयोगों को वैध बनाने का माध्यम बन रही है।