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2026-08-14

भोपाल 14 अगस्त 1947 को भारतीय संघ में शामिल: नवाब ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर किए हस्ताक्षर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

1947 में जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था, तब भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान सैद्धांतिक रूप से भारत में विलय के सख्त खिलाफ थे। उनका मानना था कि हिंदू बहुल भारत में मुस्लिम रियासतों की स्वतंत्र पहचान और स्वायत्तता सुरक्षित नहीं रह पाएगी। वे भोपाल को भारत और पाकिस्तान दोनों से अलग एक स्वतंत्र रियासत के रूप में रखना चाहते थे।
हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही थीं। पाकिस्तान के साथ उनकी योजना सफल नहीं हुई और स्वतंत्र रहने की संभावनाएं भी लगातार कमजोर पड़ती गईं।
आखिरकार, 14 अगस्त 1947 की रात ठीक 8:15 बजे नवाब ने भारतीय संघ में शामिल होने के दस्तावेज ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर कर दिए। उसी क्षण संवैधानिक रूप से भोपाल भारत का हिस्सा बन गया, हालांकि यह पूर्ण विलय नहीं, बल्कि सीमित अधिकारों वाला एक्सेशन था।
हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद नवाब ने गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन से अनुरोध किया कि इस फैसले को 10 दिन तक सार्वजनिक न किया जाए। माउंटबेटन ने उनकी यह इच्छा स्वीकार भी कर ली।
लेकिन यह गोपनीयता ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। भारत सरकार के स्टेट्स डिपार्टमेंट के सचिव वी.पी. मेनन शुरू से पूरी प्रक्रिया से वाकिफ थे और बाद में उन्होंने अपनी पुस्तक ‘द स्टोरी ऑफ द इंटिग्रेशन ऑफ द इंडियन’ में इसका विस्तृत उल्लेख भी किया।
उधर, हस्ताक्षर के महज तीन दिन बाद यह खबर भोपाल तक भी पहुंच गई।
इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन के तहत भोपाल ने रक्षा, विदेश मामले और संचार जैसे विषय भारत सरकार को सौंप दिए। लेकिन आंतरिक प्रशासन, कानून-व्यवस्था और शासन पूरी तरह नवाब के नियंत्रण में ही रहे। यानी भोपाल संवैधानिक रूप से भारत का हिस्सा बन चुका था, लेकिन नवाबशाही पहले की तरह कायम थी।
ये ठीक वही शर्तें थीं जो बाद में जम्मू-कश्मीर के विलय के समय लागू हुईं और इसी के कारण वहां धारा 370 लागू हुई थी।

महल में विलय, सड़कों पर आजादी का जश्न

15 अगस्त की सुबह भोपाल में सार्वजनिक अवकाश था। यादगार-ए-शाहजहानी पार्क में पंडित चतुरनारायण मालवीय की अध्यक्षता में प्रजामंडल की विशाल सभा हुई, जहां लोग आजादी का जश्न मना रहे थे, पर महल में एक रात पहले लिया गया ऐतिहासिक फैसला उनसे छिपा था।
16 अगस्त को लॉर्ड माउंटबेटन ने भी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन को मंजूरी दे दी, जबकि शहर को इसकी भनक तक नहीं थी।

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