बुलंद सोच, जबलपुर।

हाई कोर्ट ने बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग के जंगल क्षेत्र से फोरलेन सड़क निकालने के मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), केंद्रीय सड़क परिवहन विभाग और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को संयुक्त बैठक कर रास्ता निकालने के निर्देश दिए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बैठक में लिए गए निर्णय की रिपोर्ट चार सप्ताह बाद पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
याचिकाकर्ता का कहना है कि केसला-भौंरा-बरेठा के जंगल क्षेत्र से सड़क निकालने के लिए एनटीसीए की अनुमति नहीं ली गई।
इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा आने और सड़क दुर्घटनाओं में उनके मारे जाने का खतरा रहेगा।
पूर्व सुनवाई में हाई कोर्ट ने कहा था कि एनटीसीए ने 19.5 किलोमीटर जंगल क्षेत्र में से 10.5 किलोमीटर हिस्से को ऊपर से ले जाने की सिफारिश की थी, फिर उसका पालन क्यों नहीं हो रहा।
कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सड़क के नीचे टाइगर के लिए संकरा रास्ता बनाना उचित नहीं है।
टाइगर को सामने खुला जंगल दिखाई देगा, तभी वह सड़क पार करेगा; अंडरपास में जाने की संभावना कम है और वह कभी भी सड़क पर आ सकता है।
एनएचएआई ने फ्लाईओवर निर्माण की स्टेटस रिपोर्ट पेश की।
सुनवाई में एनटीसीए ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में फ्लाईओवर का कार्य प्रभावित होने की जानकारी दी।
कोर्ट ने सभी पक्षों की बैठक कर समाधान निकालने के निर्देश दिए।

