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2026-08-03

केनरा बैंक 8.34 करोड़ रुपये एमएसएमई लोन घोटाला: सीबीआई ने 3 नए चालान पेश किए

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

सीबीआई ने केनरा बैंक की राजगढ़ शाखा में हुए 8.34 करोड़ रुपये के एमएसएमई लोन घोटाले के मामले में तीन नए चालान पेश किए हैं।

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सीबीआई (एसीबी भोपाल) ने यह मामला केनरा बैंक के अंचल कार्यालय भोपाल के महाप्रबंधक विक्रम दुग्गल की शिकायत पर दर्ज किया था। इसमें तत्कालीन बैंक मैनेजर आरमेंद्र कुमार तिवारी, दलाल हिम्मत सिंह, बनकट सेन और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

घोटाले की कार्यप्रणाली

एडवोकेट अंकुर पांडे ने बताया कि चालान के अनुसार, तत्कालीन मैनेजर आरमेंद्र कुमार तिवारी ने वर्ष 2017 से 2020 के दौरान दलालों के साथ मिलीभगत कर 8 करोड़ 34 लाख रुपये के 87 एमएसएमई लोन स्वीकृत किए।

इनमें से 49 खातों में लगभग 5.21 करोड़ रुपये का लोन दिया गया, जबकि मौके पर कोई यूनिट या व्यवसाय स्थापित ही नहीं हुआ था।

लोन की यह राशि वेंडरों और दलालों की साठगांठ से निकाल ली गई थी।

इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का लाभ भी नियमों को दरकिनार कर उठाया गया।

रिश्वत के लेनदेन का खुलासा

सीबीआई जांच में यह पाया गया कि दलालों और वेंडरों से मिली लगभग 84.85 लाख रुपये की रिश्वत की रकम मैनेजर आरमेंद्र तिवारी, उनकी पत्नी बरखा तिवारी, ससुर, सास और अन्य रिश्तेदारों के विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन और नकद जमा कराई गई थी।

इसी रिश्वत के पैसे में से 44 लाख रुपये बैंकर चेक के माध्यम से दिल्ली के रोहिणी (सेक्टर-28) में पत्नी के नाम से एक संपत्ति खरीदी गई थी।

आंतरिक जांच और ‘टेस्ट ट्रांजेक्शन’

केनरा बैंक की विजिलेंस टीम और सीबीआई की जांच में यह खुलासा हुआ कि घोटाला उजागर होने से ठीक पहले, जून 2020 में दलाल हिम्मत सिंह के खाते से आरोपी मैनेजर आरमेंद्र तिवारी और उनके रिश्तेदारों के सात खातों में एक-एक रुपये का ‘टेस्ट ट्रांजेक्शन’ किया गया था।

इसका मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि खाते चालू हैं या नहीं, ताकि रिश्वत की बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की जा सके। इसके बाद लाखों रुपये इन खातों में भेजे गए।

लोन स्वीकृति में अनियमितताएं

सरकार ने यह शर्त रखी थी कि उन लोगों को लोन का लाभ नहीं दिया जाएगा, जिन्होंने पहले किसी सरकारी योजना के तहत लोन लिया हो, इसके बावजूद बैंक के आरोपियों ने पहले भी फायदा ले चुके व्यापारियों को लोन बांटे।

वेंडरों के नाम पर फर्जी कोटेशन और बिल लगाए गए थे, जिनका मौके पर कोई अस्तित्व नहीं था।

इन लोन खातों में वर्किंग कैपिटल दिए बिना ही केवल टर्म लोन वितरित किया गया।

अनिवार्य तीन साल की अवधि से पहले ही सब्सिडी की राशि से लोन चुकता दिखाकर खाते बंद कर दिए गए।

अब तक के चालान

सीबीआई ने इस मामले में कुल 29 केस बनाए हैं, जिनमें से 11 मामलों में पहले ही चालान पेश किया जा चुका था।

अब सीबीआई ने तीन नए मामलों में चालान पेश किए हैं, जिससे अब तक कुल 14 चालान पेश हो चुके हैं।

शेष 15 चालान सीबीआई आने वाले समय में पेश करेगी।