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2026-10-17

धार के खंडीगारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बच्चे खेल-खेल में सीख रहे संस्कृत श्लोक

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, धार।

धार जिले के बदनावर स्थित खंडीगारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय सरकारी स्कूल की पारंपरिक छवि को बदलने का प्रयास कर रहा है। यहां बच्चों के चेहरे पर स्कूल आने का डर नहीं है, न ही होमवर्क अधूरा होने की चिंता और न ही किताबों का बोझ। स्कूल की घंटी बच्चों के लिए पढ़ाई के संकेत से अधिक कुछ नया सीखने की खुशी का प्रतीक है।

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दो कमरों में संचालित इस विद्यालय में 65 बच्चे पढ़ते हैं। तीन शिक्षिकाएं नीतू दुबे, चंदनबाला कुमावत और रानी राठौर बच्चों को किताबों के साथ संस्कार, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ा रही हैं।

शिक्षिकाओं ने पढ़ाई को विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप पहली कक्षा में आए बच्चों को लगभग दो माह ही हुए हैं, लेकिन वे अक्षरों की पहचान के साथ संस्कृत के श्लोक भी सुनाने लगे हैं। छोटी कक्षा के बच्चे बड़ी कक्षा की कविताएं सुनाते हैं, और पांचवीं के बच्चे भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी कविताएं प्रस्तुत करते हैं।

दिनचर्या और शिक्षण विधियाँ

विद्यालय की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे योग, प्राणायाम और प्रार्थना से होती है। बच्चे संस्कृत के श्लोक, हनुमान चालीसा और अन्य पाठों का वाचन करते हैं।

प्रतिदिन बच्चों को एक सुविचार सुनाने का अवसर दिया जाता है, जिससे उनमें मंच पर बोलने और अपनी बात रखने का आत्मविश्वास बढ़ता है। सोमवार को एक नया प्रेरणा गीत सिखाया जाता है, जिसे बच्चे पूरे सप्ताह दोहराते हैं।

हाजिरी लगाने की प्रक्रिया भी बच्चों के लिए खेल जैसी है। शिक्षिकाओं ने माचिस की खाली डिब्बियों पर बच्चों की तस्वीर और नाम लगाए हैं। बच्चे अपनी फोटो वाली डिब्बी पहचानकर स्वयं उपस्थिति दर्ज करते हैं, जिससे उनमें पहचान, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का भाव पैदा होता है।

शिक्षिकाओं का प्रयास है कि बच्चों के मन में पढ़ाई का डर न पैदा हो। होमवर्क दिया जाता है, लेकिन उसे बोझ नहीं बनने दिया जाता। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों का काम विद्यालय में ही पूरा करवाया जाता है।

विद्यालय की दीवारों पर कविताएं, कहानियां और गतिविधियों से जुड़े पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि बच्चे किताब के बाहर भी देखकर और समझकर सीख सकें।

रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ

स्कूल में बच्चों के जन्मदिन भी सभी मिलकर मनाते हैं। परिसर में बच्चों और शिक्षिकाओं ने पौधे लगाकर फूलों की बगिया तैयार की है। बच्चे समय-समय पर पौधों की देखभाल करते हैं।

परिसर के एक हिस्से को गोबर से लीपकर बच्चों से मांडने बनवाई जाती हैं, ताकि वे अपनी ग्रामीण संस्कृति और परिवेश से भी जुड़े रहें। शनिवार को ड्राइंग और अन्य रचनात्मक गतिविधियां कराई जाती हैं।

सीमित संसाधनों में बड़ी सफलता

पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाओं के लिए विद्यालय में केवल दो कमरे हैं, जिससे संसाधन सीमित हैं, लेकिन सीखने के अवसर सीमित नहीं हैं। तीन शिक्षिकाओं की कोशिशों से यहां औसतन करीब 80 प्रतिशत बच्चे नियमित स्कूल पहुंचते हैं।

अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ा है, और शिक्षिकाओं का प्रयास है कि गांव के बच्चे, विशेषकर बच्चियां, निजी स्कूलों की ओर जाने के बजाय इसी सरकारी विद्यालय में अपनी पढ़ाई जारी रखें।

खंडीगारा का यह स्कूल दर्शाता है कि शिक्षा केवल बड़ी इमारत, महंगी सुविधाओं और किताबों का नाम नहीं है। कभी माचिस की एक डिब्बी भी बच्चे को जिम्मेदारी सिखा सकती है, एक पौधा संवेदना जगा सकता है, और एक कविता आत्मविश्वास।

शिक्षक दिवस पर इस विद्यालय की कहानी यह संदेश देती है कि जब शिक्षक बच्चों को केवल पढ़ाते नहीं, बल्कि समझते हैं, तो दो कमरों का स्कूल भी बच्चों के सपनों के लिए बड़ा आसमान बन जाता है।

राज्य शिक्षक पुरस्कार

मध्य प्रदेश के 33 सरकारी शिक्षकों का चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए किया गया है। 5 सितंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्यपाल उन्हें सम्मानित करेंगे।