बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर में गंगा और उसकी सहायक नदियों की जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिक्षानगर में मध्य प्रदेश का पहला और देश का 41वां बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर स्थापित किया गया है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की टीम ने विद्यालय में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर इस कॉर्नर की शुरुआत की। विद्यालय के प्राचार्य एके दीक्षित और ईको क्लब प्रभारी सुरेंद्र यादव के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल नदियों की स्वच्छता तक सीमित न रखते हुए उन्हें उनकी जैव विविधता और जलीय जीवों के संरक्षण से जोड़ना रहा। भारतीय वन्यजीव संस्थान की डॉक्टर रुचि बडोला के नेतृत्व और डॉक्टर संगीता अंगोम के मार्गदर्शन में टीम ने विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए। टीम में अश्मिका अग्रवाल, आरती चौहान, सिमरन अग्रवाल और अलंकृता शर्मा शामिल थीं।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को गंगा और चंबल नदी की समृद्ध जैव विविधता, मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र तथा जलीय जीवों के संरक्षण के महत्व की जानकारी प्रदान की।
इंटरएक्टिव डिस्प्ले से समझेंगे नदी का जीवन
विद्यालय में स्थापित गंगा नॉलेज सेंटर को विद्यार्थियों के लिए आकर्षक और संवादात्मक बनाया गया है। यहां इंटरएक्टिव डिस्प्ले, कटआउट्स और विभिन्न शैक्षणिक सामग्री के माध्यम से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की गई है।
इन माध्यमों से विद्यार्थी नदी में पाए जाने वाले जलीय जीवों, जैव विविधता और नदी के पर्यावरणीय महत्व को आसानी से समझ सकेंगे। विशेषज्ञों ने बताया कि नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि उनके साथ पूरा पारिस्थितिकी तंत्र जुड़ा होता है।
नदी की स्वच्छता, जलीय जीवों का संरक्षण और जैव विविधता का संतुलन एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को कम उम्र से ही नदी संरक्षण की गतिविधियों से जोड़ना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी स्थानीय नदियों, विशेषकर चंबल और उसकी जैव विविधता को समझने का अवसर मिलेगा। यह पहल उन्हें नदी संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रेरित करेगी।

