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2026-08-10

ग्वालियर नगर निगम परिषद बैठक में भाजपा-कांग्रेस पार्षदों के बीच हंगामा, हाथापाई की नौबत

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर के जलविहार में शुक्रवार को नगर निगम परिषद की अभियाचित बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में एजेंडे में तय बिंदुओं पर चर्चा होनी थी, लेकिन मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। बैठक की शुरुआत से ही भाजपा और कांग्रेस के पार्षद एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए हंगामा करते रहे। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि पार्षदों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। हालांकि, परिषद के अन्य पार्षदों ने उन्हें अलग-अलग किया। इसके बाद चर्चा शुरू भी हुई, लेकिन तीन पार्षद सभापति की आसंदी के सामने जमीन पर बैठकर सीवर व सड़कों पर जलभराव की समस्या को लेकर धरना देने लगे। इसके बाद फिर से हंगामा शुरू हो गया। सभापति की जगह बैठक की अध्यक्षता कर रही पैनल सभापति मंजू राजपूत ने बैठक को स्थगित कर दिया।

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सभापति की अनुपस्थिति पर विवाद

शुक्रवार को परिषद की अध्यक्षता सभापति मनोज तोमर नहीं कर रहे थे, वे सभा में मौजूद नहीं थे। उनकी जगह पर सभापति पैनल में दूसरे नंबर की पार्षद मंजू राजपूत सभापति की आसंदी पर बैठकर अध्यक्षता करने लगीं। जैसे ही बैठक शुरू हुई, कांग्रेस पार्षद अंकित कट्टल ने सभापति की गैरमौजूदगी में पैनल सभापति को लेकर नियम पढ़ने की मांग की। इसी बात पर अंकित कट्टल और भाजपा पार्षद गिर्राज कंषाना के बीच बहस शुरू हो गई। इस बहस में दोनों ही पक्षों के अन्य पार्षद शामिल हो गए। बहस धीरे-धीरे हंगामे में बदल गई और दोनों ही पार्षद आमने-सामने आ गए तथा एक-दूसरे से हाथापाई पर उतारू हो गए। बाद में अन्य पार्षदों ने उन्हें पकड़ा और अलग-अलग किया। हालांकि, सभापति के आदेश पर नियम भी पढ़ा गया, लेकिन नियम में स्थिति स्पष्ट न होने से दोनों ही पक्ष शांत हो गए।

पैनल सभापति के नियम और आज की स्थिति

सभापति की गैरमौजूदगी में बैठक की अध्यक्षता करने के लिए दो पैनल सभापति चुने जाते हैं। इनमें पैनल में एक व दो नंबर की स्थिति होती है, यानी मुख्य सभापति नहीं होते तो पहले पैनल में एक नंबर पर मौजूद पार्षद सभापति की आसंदी पर बैठता है। यदि वह भी नहीं है तो दूसरे नंबर का पैनल सभापति बैठक का संचालन करता है। आज विवाद इसलिए हुआ क्योंकि मुख्य सभापति की अनुपस्थिति में पैनल में नंबर एक सभापति गिर्राज कंषाना देरी से आए थे। ऐसे में दूसरे नंबर की पैनल सभापति मंजू राजपूत आसंदी पर बैठ गईं। चूंकि एक बार सभापति की आसंदी पर कोई बैठ जाता है तो वही बैठक की पूरी कार्रवाई को संचालित करता है।

केबल खरीद जांच रिपोर्ट पर आरोप

परिषद बैठक में निगम में केबल खरीद में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट पेश की जानी थी। इसमें पहले नोडल अधिकारी अभिलाषा बघेल को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद फिर से मामले की जांच समिति ने की और उसके संयोजक भाजपा पार्षद व पैनल सभापति गिर्राज कंषाना थे। बताया जाता है कि चूंकि जांच समिति के संयोजक गिर्राज कंषाना थे, आज वे सभापति की आसंदी पर होते तो उन्हें ही निर्णय लेना पड़ता। बताया जाता है कि इसलिए ही वे देरी से आए तो उनकी जगह पर मंजू राजपूत आसंदी पर बैठ गईं। इसी बात को कांग्रेस पार्षद मुद्दा बनाने लगे।

सीवर व जलभराव की समस्या पर धरना

वर्षा के दौरान सड़कों पर हुए जलभराव व उफन रही सीवर लाइनों की समस्या को पहले भाजपा पार्षद ब्रजेश श्रीवास ने उठाया। इसके बाद सुरेश सोलंकी ने इसी मुद्दे पर महापौर व अफसरों को घेरा। अपनी मांग पूरी न होने से वे आसंदी के सामने धरने पर बैठ गए। उनका साथ देने के लिए ब्रजेश श्रीवास भी बैठ गए। उनका साथ देने के लिए एक भाजपा महिला पार्षद भी आ गईं। इसके बाद और हंगामा होने लगा तो सभापति मंजू राजपूत ने सभा को स्थगित कर दिया।

अन्य मुद्दे और नारेबाजी

बैठक में पार्षदों ने कलेक्टर व निगम आयुक्त के साफ पानी में खड़े होकर फोटो खिंचवाने को लेकर कहा कि अफसर केवल अपने उच्चाधिकारियों को दिखाने के लिए ऐसे फोटो खिंचवाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वे समस्या वाले क्षेत्रों में नहीं जाते, जहां जलभराव की वजह से बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे। निगम परिषद की बैठक में आयुक्त के न आने को लेकर भी विपक्षी पार्षद आरोप लगाते रहे। हंगामे के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। उन्हीं की तर्ज पर कुछ भाजपा पार्षदों ने भी एक बार प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगा दिए।