बुलंद सोच, भोपाल।

मध्यप्रदेश के 10 लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अगले वित्तीय वर्ष में 18 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। सरकार इसके लिए विभागों के स्थापना व्यय में 78 प्रतिशत का बजट प्रविधान कराएगी, ताकि भारत सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ता व महंगाई राहत में वृद्धि करने पर प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल सके।
वर्तमान में प्रदेश में 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 68 प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ते के लिए बजट रखा है।
भारत सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को बढ़ाकर 62 प्रतिशत कर चुकी है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे घटनाक्रम से प्रभावित हो रहे निर्यात और कमजोर मानसून की आशंका से पड़ने वाले असर को देखते हुए वृद्धि का निर्णय नहीं लिया है। भारत सरकार एक बार फिर महंगाई दर में वृद्धि करने की तैयारी में है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू करते हुए सभी विभागों से कहा है कि वे अपने स्थापना व्यय में महंगाई राहत के लिए 78 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते के लिए प्रविधान रखें। इसका अर्थ है कि वर्तमान दर के हिसाब से 18 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
वित्तीय वर्ष 2028-29 में यह दर 88 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2029-30 में 98 प्रतिशत तक होगी।
कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगें
कर्मचारी और पेंशनरों के संगठन लगातार महंगाई को देखते हुए महंगाई भत्ते की दर में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने 18 अगस्त को आंदोलन की घोषणा की है।
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सातवें वेतनमान में न्यूनतम पेंशन 7,750 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने की मांग की है। संगठन ने 48 माह का एरियर भी मांगा है।
अन्य प्रस्तावित वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2027-28 में संविदा पर नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों के पारिश्रमिक में चार प्रतिशत की दर से वार्षिक वृद्धि होगी, जो वर्तमान दर के समान है।
सभी कर्मचारियों को तीन प्रतिशत की दर से वार्षिक वेतन वृद्धि देना प्रस्तावित किया गया है।

