BREAKING NEWS
2026-08-10

इंदौर गैस ब्लास्ट: हाईकोर्ट ने नगर निगम और शासन को ठहराया समान रूप से जिम्मेदार, एसडीएम ने झूठे शपथ पत्र पर मांगी माफी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर के विजय नगर क्षेत्र स्थित सुमन नगर में 23 जून 2026 को हुए गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर एसडीएम जगदीश धनगर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने झूठे शपथ पत्र के लिए कोर्ट से माफी मांगी।

Advertisement

धनगर ने बताया कि टाइपिंग में गलती के कारण शपथ पत्र में अहमदाबाद के निजी अस्पताल का भुगतान होने की बात लिखी गई थी, जबकि अहमदाबाद के निजी अस्पताल का भुगतान अभी तक हुआ नहीं है और प्रक्रिया में है। उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अस्पताल का भुगतान सात दिन में कर दिया जाएगा।

एसडीएम ने यह भी कहा कि हादसे में घायल लोगों द्वारा बॉम्बे अस्पताल और अरबिंदो अस्पताल में उपचार के लिए जमा कराई गई राशि वापस दिलवाने की प्रक्रिया भी एक सप्ताह में शुरू कर दी जाएगी।

शासन का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि चूंकि मुआवजे के लिए नगर निगम और शासन दोनों बराबरी से जिम्मेदार हैं, इसलिए घायलों के उपचार का खर्च दोनों बराबरी से वहन करेंगे। दो पेज के आदेश में कोर्ट ने प्रथमदृष्टया इस हादसे के लिए नगर निगम और शासन दोनों को बराबरी का जिम्मेदार माना है।

इसके साथ ही कोर्ट ने अवंतिका गैस कंपनी को भी पक्षकार बनाने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

6 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई के दौरान एसडीएम जगदीश धनगर ने कोर्ट को बताया था कि हादसे में घायल लोगों के उपचार के बिल का भुगतान अस्पतालों को किया जा चुका है। उन्होंने इस बात के समर्थन में एक शपथ पत्र भी दिया था।

याचिकाकर्ता ने इस पर आपत्ति लेते हुए कोर्ट को बताया था कि शपथ पत्र झूठा है और घायलों के उपचार का बिल अब भी बकाया है। इस पर कोर्ट ने धनगर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए थे।

सुमन नगर हादसे को लेकर हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका (पीआईएल) एडवोकेट रितेश ईनाणी ने दायर की है। याचिका में उन्होंने जिम्मेदारों पर आपराधिक केस दर्ज करने और घायलों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।

याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हादसे में झुलसे लोगों का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने और गंभीर रूप से झुलसी युवती को उपचार के लिए अहमदाबाद भेजने का आदेश दिया था। याचिका की सुनवाई के दौरान वार्ड 31 के पार्षद बालमुकुंद सोनी का नाम एफआईआर में शामिल किया जा चुका है।

कोर्ट ने नगर निगम द्वारा यह कहने पर नाराजगी जताई कि गैस पाइपलाइन फोड़े जाने, ब्लास्ट होने और पांच लोगों के झुलसने के बावजूद उन्हें यह पता नहीं कि हादसा कैसे हुआ।