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2026-10-17

यूपीआई एमडीआर शुल्क विरोध: इंदौर के व्यापारी मनाएंगे ‘नो यूपीआई डे’

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

अगले माह से यूपीआई पर लागू हो रहे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क के विरोध में इंदौर के व्यापारी सबसे पहले आगे आए हैं। इंदौर के व्यापारी बुधवार को ‘नो यूपीआई डे’ मनाकर प्रस्तावित शुल्क का विरोध करेंगे। विरोध प्रदर्शन का केंद्र राजवाड़ा, सियागंज, मारोठिया और सराफा बाजार जैसे पुराने बाजार रहेंगे। इंदौर देश का पहला शहर होगा जहां के व्यापारी सबसे पहले यूपीआई के नए शुल्क के विरोध में सड़क पर आ गए हैं। इस विरोध आंदोलन से पहले मंगलवार शाम को टाइल्स व सेनेटरी व्यापारी एसोसिएशन ने एक मशाल रैली भी निकाली।

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व्यापारी संगठनों की भागीदारी

अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने एमडीआर के विरोध का ऐलान किया है। शहर के कुल सवा सौ व्यापारी संगठन इस चेंबर के सदस्य हैं, यानी एक साथ सवा सौ व्यापारी संगठन विरोध आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। तमाम पुराने बाजारों के साथ पेट्रोल-डीजल पंप, प्लायवुड, लोहा बाजार, सेनेटरी-टाइल्स व्यापारी जैसे बाजारों में भी ‘नो यूपीआई डे’ का असर देखा जाएगा। रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन बुधवार को राजवाड़ा पर दुकानों के यूपीआई बार कोड को एकत्र कर काले कपड़े से ढंक कर विरोध प्रदर्शन करेगा। इंदौर सेनेटरी एंड टाइल्स व्यापारी एसोसिएशन ने आधिकारिक आंदोलन से पहले गांधी प्रतिमा पर मशाल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन भी किया।

यूपीआई लेनदेन के आंकड़े

यूपीआई ट्रांजेक्शन के आंकड़ों के अनुसार, इंदौर प्रदेश में पहले और देश में 21वें नंबर पर है। अगस्त के ट्रांजेक्शन के लिहाज से भोपाल देश में 37वें, ग्वालियर 111वें और उज्जैन 129वें नंबर पर हैं। वहीं प्रदेश में इंदौर के बाद इनका नंबर दूसरा, तीसरा और चौथा है।

एमडीआर शुल्क का संभावित प्रभाव

सरकार का दावा है कि यूपीआई शुल्क का असर केवल व्यापारी पर पड़ेगा और उपभोक्ता प्रभावित नहीं होगा, लेकिन व्यापारी और विशेषज्ञ दोनों इसे गलत बयान बता रहे हैं। अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के अनुसार, व्यापारी पर शुल्क लगेगा तो वह खुद बोझ क्यों उठाएगा; लागत में उसका खर्च जोड़ा जाएगा जिसका बोझ अंततः खरीदार पर आएगा। उन्होंने बताया कि एक रिटेल व्यापारी आगे थोक वाले के लिए खरीदार है, और जब वह अपने यूपीआई में आए पैसे को खर्च करेगा तो उसके व्यापारी पर शुल्क लगेगा जो उससे वसूला जाएगा।

निवेशकों पर असर

कर सलाहकार आर.एस. गोयल के अनुसार, सिर्फ उपभोक्ता और आम बाजार ही नहीं बल्कि एमडीआर शुल्क से निवेशक भी प्रभावित होंगे। गोयल ने बताया कि एमडीआर से स्टॉक ब्रोकर्स पर भी अतिरिक्त लागत का बोझ आएगा। उदाहरण के लिए, यदि निवेशक किसी ब्रोकर को पांच लाख रुपये ट्रांसफर करता है, उसमें से एक लाख बाजार में निवेश होते हैं। सेबी के नियम के अनुसार, 30 दिन में शेष पैसा ब्रोकर फिर निवेशक को वापस करता है। ब्रोकर भले ही बिना आय के पैसा वापस कर रहा हो, लेकिन उस पर पूरे पांच लाख रुपये के एमडीआर का बोझ तो आ ही जाएगा। ऐसे में यह निवेश में भी लागत बढ़ाएगा।

यूपीआई उपयोग और शुल्क का बोझ

नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में इस्तेमाल हो रहे यूपीआई ट्रांजेक्शन में से करीब 25.8 प्रतिशत किराना (ग्रॉसरी) और सुपर मार्केट में होते हैं। धन के हिसाब से देखें तो इसकी वैल्यू 9.7 प्रतिशत होती है। हालांकि, पेमेंट कॉर्पोरेशन दावा कर रहा है कि इनमें से ज्यादातर दो हजार रुपये से कम के होते हैं, ऐसे में ज्यादातर पर बोझ नहीं आएगा। दूसरे नंबर पर रेस्टोरेंट के बिल चुकाने में यूपीआई का इस्तेमाल होता है जो 18.2 प्रतिशत है। वैल्यू के लिहाज से लोन और ईएमआई चुकाने में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 8.3 प्रतिशत की है। यानी लोन चुकाने और ईएमआई भरने वालों पर इसका सबसे ज्यादा बोझ आता दिख रहा है, क्योंकि किस्तों का आंकड़ा ज्यादातर मामलों में दो हजार रुपये से ज्यादा होता है।

अन्य शहरों में विरोध की तैयारी

एमडीआर शुल्क के विरोध में 23 सितंबर को जबलपुर के व्यापारी व जनसंगठन भी ‘नो यूपीआई डे’ मनाएंगे।