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साइबर ठगी की रकम निकालने वालों की पहचान पर हाई कोर्ट सख्त

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर। हाई कोर्ट ने साइबर ठगी की रकम को म्यूल या किराये पर उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने और बाद में एटीएम से नकद निकालने के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से विचार करने को कहा है कि बड़ी या संदिग्ध रकम एटीएम से निकालते समय रकम निकालने वाले व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण की व्यवस्था की जा सकती है या नहीं।
इसके लिए बायोमेट्रिक, चेहरा पहचानने जैसी तकनीक अथवा अन्य विश्वसनीय पहचान माध्यमों के उपयोग पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।
राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता वीएस चौधरी व प्रियंका मिश्रा ने पक्ष रखा।
जबलपुर निवासी चैताली मित्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने बताया कि इस मामले में अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
इन आरोपितों पर साइबर ठगी से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराने का आरोप है।
जांच एजेंसी मुख्य आरोपित तक पहुंचने के करीब है और जांच पूरी करने के लिए समय मांगा गया है।
कोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी की रकम कई खातों से गुजरने के बाद म्यूल अकाउंट तक पहुंचती है और एटीएम से नकद निकाल ली जाती है। इसके बाद मनी ट्रेल कमजोर पड़ जाती है और जांच एजेंसी के पास कई बार सीसीटीवी फुटेज ही सीमित साक्ष्य बचता है।
कोर्ट ने यह भी विचार करने को कहा कि यदि खाताधारक किसी दूसरे व्यक्ति को रकम निकालने की अनुमति देता है तो उसका डिजिटल अथवा दस्तावेजी रिकॉर्ड और अतिरिक्त प्रमाणीकरण संभव है या नहीं।
जांच अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपित टेलीग्राम के जरिए लोगों से संपर्क कर बैंक खाते किराये पर लेते थे।
मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर 2026 को होगी।

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